सावधान! 24 फरवरी से लग रहा है होलाष्टक: रुक जाएंगे मांगलिक कार्य, भक्ति और दान के लिए श्रेष्ठ समय
भीलवाड़ा (हलचल)। फाल्गुन माह की मस्ती और होली के हुड़दंग से पहले भक्ति और संयम का समय यानी 'होलाष्टक' शुरू होने वाला है। इस साल होलाष्टक 24 फरवरी से आरंभ होकर 2 मार्च तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन सात दिनों में शुभ कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी, लेकिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
शुभ कार्यों पर 'ब्रेक', साधना पर 'फोकस'
होलाष्टक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत, संपत्ति का क्रय-विक्रय और लंबी यात्राओं जैसे शुभ कार्यों से बचना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है, जिससे मांगलिक कार्यों में बाधा आने की आशंका रहती है। 2 मार्च को होलिका दहन के साथ होलाष्टक का समापन होगा और 3 मार्च को धुलंडी (होली) का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
क्या करें और क्या न करें?
होलाष्टक का अर्थ केवल कार्यों पर रोक नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। इन दिनों में ये कार्य विशेष फलदायी हैं:
दान-पुण्य: जरूरतमंदों की सहायता और गौ-सेवा से विशेष पुण्य मिलता है।
भक्ति व जप: धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन, सत्संग और गुरु सेवा मानसिक शांति प्रदान करती है।
सकारात्मकता: विवाद, झगड़े और तनाव से दूर रहकर संयमित आचरण अपनाना चाहिए।
पर्यावरण सेवा: पौधारोपण और प्रकृति के संरक्षण के लिए भी यह समय उत्तम है।
शीतला सप्तमी 11 मार्च को: घर-घर पूजी जाएंगी माता
इस बार शीतला सप्तमी (बास्योड़ा) 11 मार्च को मनाई जाएगी। महिलाएं शीतला माता का पूजन कर ठंडे पकवानों का भोग लगाएंगी। इसके लिए 10 मार्च को 'रांधापोवा' किया जाएगा, यानी भोजन एक दिन पूर्व ही तैयार कर लिया जाएगा।
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