व्यक्ति के प्रथम गुरु उसके माता पिता होते हैं- पंचोली
बडलियास श्रीराम कथा के छठे दिन कथा वक्ता श्री मुरलीधर पंचोली ने मानस के अनुसार भक्तों को श्रीराम द्वारा दंडकारण्य में जा कर राक्षसों का संहार करना तथा ऋषि मुनियों को अभय दान की कथा का श्रवण करवाते हुए सती अनुसूया द्वारा माता सीता को दिए गए पतिव्रता के उपदेशों, का वर्णन किया। पत्नी के लिए उसका पति ही गुरू होता है, शास्त्रों के अनुसार स्त्री को पति के आलावा अन्य किसी पुरुष को गुरू बनाने की आवश्यकता नहीं रह जाती है।
इसी तरह हर मनुष्य को प्रथम पाठ पढ़ाने वाले उसके प्रथम गुरू माता पिता होते है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता पिता की चरण वंदना करनी चाहिए। कथा में जोगणिया माता शक्ति पीठ के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी, श्री मुनिकुल ब्रह्मचर्याश्रम वेद संस्थान के सचिव गोपी किशन पंचोली तथा गणमान्य नागरिकों ने उपस्थित हो कर कथा श्रवण की। सिंगोली चारभुजा से जवाहर मल पाराशर, बडलियास से मदन बसेर, दुर्गा लाल गट्याणी हरिशंकर सारस्वत, जोगणियां के अध्यक्ष, सत्यनारायण जोशी, श्रीमती लाड देवी शर्मा पंचोली आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य नवल किशोर सभी वेदाध्यापक व गांव के अन्य गणमान्य उपस्थित थे।