जोगणिया माता शक्तिपीठ पर उमड़ा आस्था का महासागर:: अष्टमी पर लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, रातभर गूंजे माता के भजन

Update: 2026-03-26 16:35 GMT


लाडपुरा (शिव लाल जांगिड़)। भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ की सीमा पर ऊपरमाल क्षेत्र की ऊँची पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक आस्था का केंद्र, जोगणिया माता प्राचीन शक्तिपीठ इन दिनों चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लगभग 300 फीट ऊँची पहाड़ी पर विराजमान माता रानी के दर्शन के लिए नवरात्रि के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।



दुर्गाष्टमी पर महारात्रि जागरण: रातभर दर्शन और भजन संध्या

चैत्र नवरात्रि की दुर्गाष्टमी (गुरुवार) के अवसर पर जोगणिया माता मंदिर में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। माता के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की किलोमीटर लंबी कतारें देखी गईं। पूरा मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जिससे क्षेत्र भक्ति और उत्साह के अनूठे माहौल से सराबोर नजर आ रहा है।

जोगणिया माता शक्तिपीठ संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने बताया कि दुर्गाष्टमी के विशेष अवसर पर 'महारात्रि जागरण' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान भक्तों की सुविधा के लिए पूरी रात माता के दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रसिद्ध लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जा रही भजन संध्या ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है। संस्थान ने दर्शन, पेयजल, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की हैं ताकि तपती गर्मी के बावजूद भक्तों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। अनुमान है कि अष्टमी के दिन और रात मिलाकर लाखों श्रद्धालु माता के दरबार में शीश नवाएंगे।

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कों में हुआ कायाकल्प: घने जंगल से भव्य शक्तिपीठ तक

वरिष्ठ पत्रकार शिव प्रसाद व्यास ने जोगणिया माता धाम के उल्लेखनीय विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों में यह क्षेत्र घने जंगलों से निकलकर एक भव्य और सुविधायुक्त शक्तिपीठ के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ यहाँ वेद पाठशाला, गौशाला विस्तार, श्री राम वाटिका, नवग्रह नक्षत्र वाटिका, भव्य धर्मशालाएं, पक्की सीढ़ियां और सड़क जैसी कई आधुनिक सुविधाओं का विकास हुआ है। अब न केवल राजस्थान बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।

भक्ति और मनोरंजन का संगम: सप्तमी को रासलीला, लगा मेला

नवरात्रि महोत्सव के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना हुआ है। सप्तमी के अवसर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा रासलीला और भजनों की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। साथ ही, कृष्णा इवेंट की ओर से प्रस्तुत अनेक झाकियों ने भक्तों का मन मोह लिया और वे भक्ति भाव में झूम उठे। मंदिर परिसर के पास मेले का भी आयोजन किया गया है, जहाँ झूले, चकरी और विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हुई हैं, जो श्रद्धालुओं, विशेषकर बच्चों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

27 मार्च को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन

लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में चल रहे चैत्र नवरात्र महोत्सव का भव्य समापन 27 मार्च को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ होगा। माता के प्रति भक्तों की यह अगाध श्रद्धा और उमड़ रही भारी भीड़ इस शक्तिपीठ की अपार महिमा और महत्ता को एक बार फिर रेखांकित कर रही है।




 


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