इंद्रदेव भी हुए दर्शन को आतुर, झमाझम बरसकर किया सांवलिया का सत्कार

Update: 2025-09-03 14:33 GMT

 

चित्तौड़गढ़, जल झूलनी एकादशी के पावन अवसर पर सांवलिया सेठ की धरती चित्तौड़गढ़ भक्ति, आस्था और उमंग से सराबोर हो उठी। बुधवार को राजभोग आरती के बाद भगवान सांवलिया सेठ के बाल विग्रह की भव्य शोभायात्रा निकली, जिसमें मानो इंद्रदेव भी दर्शन के लिए आतुर होकर झमाझम बरस पड़े। मेघों की वर्षा ने भक्तों के उत्साह को दोगुना कर दिया और इस पर्व को और भी अलौकिक बना दिया।

रजत रथ में सांवलिया सेठ की शोभायात्रा




 


रजत रथ में विराजित सांवलिया सेठ की शोभायात्रा जैसे ही शहर की गलियों में निकली, वातावरण “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैया लाल की” और “सांवरिया सेठ की जय” के जयकारों से गूंज उठा। अबीर-गुलाल की वर्षा, बैंड-बाजों की स्वरलहरियां और भक्तों का नृत्य हर दृश्य को भक्ति और उल्लास के रंगों से जीवंत बना रहा। सांवलिया सरोवर घाट पर भगवान का जल स्नान और विशेष पूजा ने प्रकृति और ईश्वर के मिलन का एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। इस दौरान इंद्रदेव की निरंतर वर्षा ने हर भक्त के तन-मन को भिगोकर आध्यात्मिक आनंद को और गहरा कर दिया।

हजारों श्रद्धालु बने साक्षी



 


मंदिर बोर्ड चेयरमैन जानकीदास, सांवलिया मंदिर मंडल की सीईओ प्रभा गोतम, बोर्ड सदस्यों सहित हजारों ग्रामीण और श्रद्धालु इस अनूठे आध्यात्मिक उत्सव के साक्षी बने। भक्तों की भीड़ ने शोभायात्रा में शामिल होकर भगवान सांवलिया सेठ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।

तीन दिवसीय मेले का समापन गुरुवार को


जल झूलनी एकादशी के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय मेले का समापन गुरुवार, 4 सितंबर को होगा। इस दौरान मीरा रंग मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही, सामाजिक सरोकार के तहत दिव्यांगों को स्कूटी वितरण और प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा।

भक्ति और प्रकृति का संगम



 यह उत्सव न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक बना, बल्कि प्रकृति और भक्ति के अद्भुत संगम का भी साक्षी रहा। सांवलिया सेठ के भक्तों ने इस अवसर पर एक बार फिर अपनी आस्था और उत्साह का प्रदर्शन किया, जिसने चित्तौड़गढ़ को भक्ति की नगरी के रूप में और अधिक चमका दिया।किया जाएगा।

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