दशहरे के बाद खत्म होगा राजे का 'वनवास'!
राजस्थान की सियासत एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सक्रियता से गरमा उठी है। साल 2023 में भाजपा हाईकमान द्वारा भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से राजनीतिक रूप से हाशिए पर दिख रहीं राजे अब लगातार भाजपा और आरएसएस नेताओं से मुलाकात कर रही हैं। इसे राजे के राजनीतिक पुनरागमन का संकेत माना जा रहा है।
राजस्थान में संभावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच कहा जा रहा है कि राजे अपने वफादार नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कराने की कोशिशों में जुटी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ और नीमबहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी जैसे उनके करीबी नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हाल ही में राजे ने इस मुद्दे पर भाजपा केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की है।
इसके अलावा, संसद के मानसून सत्र के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भेंट की थी। वहीं, जोधपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से उनकी करीब 30 मिनट की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। नागपुर में संघ के शीर्ष नेताओं से हुई उनकी मुलाकातों ने भी अटकलों को और मजबूत किया है।
मोदी नेतृत्व वाली भाजपा के साथ राजे के रिश्ते हमेशा सहज नहीं रहे। भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने से उनकी असहजता और बढ़ गई, जिसके चलते उन्होंने पार्टी की कई अहम बैठकों से दूरी बनाई और उपचुनावों और हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रचार से भी किनारा कर लिया, जबकि उन्हें स्टार प्रचारक घोषित किया गया था।
R
पिछले महीने धौलपुर में एक सभा के दौरान राजे ने कहा था कि वनवास सिर्फ श्रीराम के जीवन का हिस्सा नहीं है… हर इंसान के जीवन में वनवास आता है और चला भी जाता है। इस कथन को उनके समर्थकों ने ‘वापसी का संकेत’ माना। राजे का नाम उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में भी आया था, लेकिन यह पद सीपी राधाकृष्णन को मिला। अब जबकि भाजपा नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश में है तो राजे के समर्थक उन्हें भी दावेदार मान रहे हैं।
