शिक्षा हुई महंगी: निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक बेहाल, नया सत्र शुरू होते ही जेब पर डाका
भीलवाड़ा नए शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ ही अभिभावकों की चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। बच्चों के एडमिशन, महंगी किताबें, कॉपियां, ड्रेस और जूतों के बढ़ते दामों ने मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। निजी स्कूलों द्वारा हर साल पाठ्यक्रम और ड्रेस बदलने की नीति ने अभिभावकों को आर्थिक दलदल में धकेल दिया है।
कमीशन का खेल: चुनिंदा दुकानों पर मनमाने दाम
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के बीच सीधा कमीशन का गठजोड़ चल रहा है। आर सी व्यास निवासी रमेश और इंदिरा ने बताया कि स्कूलों की किताबें केवल तय दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं, जहां कीमतें सामान्य से कहीं अधिक हैं। विरोध करने पर बच्चों के साथ स्कूल में भेदभाव का डर सताता है, जिसके कारण अधिकांश पालक चुपचाप मनमानी सहने को मजबूर हैं। प्रशासन की चुप्पी भी इस लूट को बढ़ावा दे रही है।
एनसीईआरटी को ठंडे बस्ते में डाला, निजी प्रकाशकों की चांदी
पिछले वर्ष कई स्कूलों ने कक्षा 1 से 8वीं तक एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें लागू की थीं, जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन इस बार फिर से निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोप दी गई हैं। पुरानी किताबें और ड्रेस पूरी तरह बेकार हो गई हैं, जिससे दूसरे बच्चे उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। नियमित अंतराल पर ड्रेस का रंग बदल देना भी पालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
8 से १० हजार रुपये का शुरुआती झटका
अभिभावक शिव वैष्णव ने बताया कि बच्चे के एडमिशन, यूनिफॉर्म, बैग और किताबों पर ही करीब 8 से 10 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। वहीं, कक्षा छह के एक बुक सेट की कीमत 4500 रुपये तक पहुंच गई है। स्कूलों की सालाना फीस 50 से 60 हजार रुपये के बीच है। आरोप है कि किताबों के सेट पर 50 से 60 प्रतिशत तक का भारी मुनाफा वसूला जा रहा है, जिससे आम आदमी के लिए बच्चों को पढ़ाना अब बड़ी चुनौती बन गया है।
भीलवाड़ा हलचल न्यूज पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए संपर्क करें:
समाचार: प्रेम कुमार गढवाल 9413376078 (Email: bhilwarahalchal@gmail.com, व्हाट्सएप: 9829041455)
विज्ञापन: विजय गढवाल 6377364129
संपर्क कार्यालय: भीलवाड़ा हलचल, कलेक्ट्री रोड, नई शाम की सब्जी मंडी, भीलवाड़ा फोन: 7737741455.
