एप्रोप्रिएशन बिल प्रदेश के विकास और वित्तीय अनुशासन का प्रतीक– विधायक कृपलानी
निंबाहेड़ा।पूर्व यूडीएच मंत्री एवं विधायक चंद कृपलानी ने विधानसभा में एप्रोप्रिएशन बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास, सुशासन और जनकल्याण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि एप्रोप्रिएशन बिल राज्य की संचित निधि से विधानसभा द्वारा स्वीकृत अनुदानों एवं व्ययों के विधिवत आहरण की संवैधानिक अनुमति प्रदान करता है और यह वित्तीय अनुशासन तथा पारदर्शिता की मूल भावना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बिना एप्रोप्रिएशन बिल के राज्य की संचित निधि से एक भी रुपया व्यय नहीं किया जा सकता। यह लोकतंत्र की वह प्रक्रिया है जो कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेह बनाती है। कृपलानी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक विभाग को आवंटित राशि उद्देश्यपूर्ण हो, अनुत्पादक व्यय में कटौती हो, पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता मिले तथा डिजिटल मॉनिटरिंग से योजनाओं की सतत समीक्षा हो।
कृपलानी ने कहा कि इस बिल के माध्यम से आधारभूत संरचना, शहरी विकास, ग्रामीण सड़क व पेयजल परियोजनाओं, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, किसान, महिला और युवा कल्याण योजनाओं को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे विशाल और भौगोलिक दृष्टि से विविध राज्य में संतुलित विकास अत्यंत आवश्यक है, इसलिए मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज, आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लक्षित योजनाएँ तथा नगरीय निकायों को वित्तीय सशक्तिकरण जैसे कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाली राशि वित्त आयोग की सिफारिशों, योजनाओं के शेयरिंग पैटर्न और संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित होती है। कई बार अनुदान की राशि उपयोगिता प्रमाण पत्र, प्रदर्शन आधारित मानकों और योजनाओं की प्रगति पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय लंबित परियोजनाओं और वित्तीय अव्यवस्था का असर आगामी वर्षों पर भी पड़ा।
*विधायक कृपलानी ने किया कांग्रेस पर तीखा प्रहार*
कृपलानी ने अपने भाषण में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड काल में दवाइयों, भोजन पैकेट, मास्क और सैनिटाइजर की खरीद में अनियमितताएँ हुईं। उन्होंने कहा कि सत्ता संघर्ष, होटल राजनीति और बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने में विफलता कांग्रेस शासन की पहचान रही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को मोबाइल देने, मुफ्त बिजली और अन्य लोकलुभावन वादे केवल घोषणाओं तक सीमित रहे। भर्तियाँ कोर्ट में उलझी रहीं और पेपर लीक प्रकरणों ने युवाओं के भविष्य के साथ कुठाराघात किया।
कृपलानी ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयानों का कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा कि बजट को “हेडलाइन मैनेजमेंट” बताना किसानों, युवाओं, महिलाओं और कर्मचारियों का अपमान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार दिखावे की नहीं, बल्कि विकास की राजनीति कर रही है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार में अनेक घोषणाएँ तो हुईं, परंतु वित्तीय संसाधनों का यथार्थवादी आकलन नहीं था। उनके विधानसभा क्षेत्र में निम्बाहेड़ा–मंगलवाड़ सड़क की घोषणा और शिलान्यास के बावजूद कार्य आगे नहीं बढ़ सका और अंत में “खजाना खाली” होने की स्थिति सामने आई।
*भाजपा की डबल इंजन सरकार करती है विकास की राजनीति*
कृपलानी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान निवेश, आधारभूत संरचना, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से विभिन्न योजनाओं में अतिरिक्त स्वीकृतियाँ और निवेश के अवसर प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार परिणाम आधारित व्यय और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है तथा आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर और विकास सूचकांकों में स्पष्ट दिखाई देगा।
कृपलानी ने कहा कि एप्रोप्रिएशन बिल केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की विकास यात्रा का विधिक आधार है। यह किसानों की उम्मीद, युवाओं के अवसर, महिलाओं के सम्मान और गरीबों के उत्थान का माध्यम है। उन्होंने सदन से इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह किया।
