मृदा स्वास्थ्य संवर्धन हेतु "आपणो खेत - आपणी खाद" अभियान का आगाज

Update: 2026-04-09 06:59 GMT

बेगूं (रावडदा)। कृषि विभाग द्वारा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष पहल शुरू की गई है। कृषि पर्यवेक्षक केंद्र, रावडदा (प.स. बेगूं) के तत्वावधान में आज "आपणो खेत - आपणी खाद" कार्यक्रम के तहत मृदा स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

ग्राम पंचायत रावडदा में आयोजित इस बैठक में सहायक कृषि अधिकारी श्री हेमराज धाकड़ एवं कृषि पर्यवेक्षक मुकेश कुमार मीणा ने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से बचाकर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की ओर ले जाना है।

प्रमुख चर्चा के बिंदु:

संगोष्ठी के दौरान किसानों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं:

मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card): कार्ड की उपयोगिता और उसके आधार पर ही खाद डालने की सलाह दी गई।

जैविक खाद का महत्व: रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खाद और केंचुआ खाद (Vermicompost) के लाभ बताए गए।

पोषक तत्व प्रबंधन: मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के संतुलित उपयोग की तकनीक साझा की गई।

विशेष अभियान का उद्देश्य

यह आयोजन कृषि आयुक्तालय, राजस्थान के निर्देशों के क्रम में आयोजित किया गया है। विभाग का मानना है कि यदि किसान 'अपनी खाद' (जैविक व केंचुआ खाद) का स्वयं उत्पादन और प्रयोग करेंगे, तो न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे, जिन्हें मिट्टी के नमूने लेने और स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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