प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र अब एक ही कैंपस में, सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश
देश भर में प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को एक ही कैंपस में संचालित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाया है। इस पहल का उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) को मजबूत करना, ग्रामीण और शहरी बच्चों के बीच शैक्षिक अंतर को पाटना, और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है।
दिशा-निर्देशों की मुख्य विशेषताएं
बुधवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।नए दिशा-निर्देशों के तहत, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्कूल शिक्षकों के बीच मासिक समन्वय बैठकें अनिवार्य होंगी। इसके साथ ही ECCE दिवस, प्रवेशोत्सव, और अभिभावक-शिक्षक बैठकों जैसे संयुक्त आयोजन और एक एकीकृत गतिविधि कैलेंडर लागू किया जाएगा। इन गतिविधियों का लक्ष्य बच्चों को प्री-स्कूल से प्राथमिक शिक्षा में सुगम बदलाव सुनिश्चित करना है।
बुनियादी ढांचे के लिए मानदंड
इस बदलाव के साथ, सरकार ने बच्चों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कई मानदंड निर्धारित किए हैं:अलग प्रवेश और निकास द्वार: छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए।
मध्याह्न भोजन रसोईघर: पौष्टिक भोजन की उपलब्धता के लिए समर्पित रसोई।
इनडोर और आउटडोर खेल क्षेत्र: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए।
बच्चों के अनुकूल शौचालय: स्वच्छता और सुविधा को बढ़ावा देने के लिए।
ग्रामीण बच्चों का बेहतर प्रदर्शन
हाल के एक सर्वे में सामने आया कि कुछ क्षेत्रों में ग्रामीण बच्चे शहरी बच्चों की तुलना में बेहतर शैक्षिक नतीजे दे रहे हैं। इस प्रोत्साहनजनक रुझान को देखते हुए, सरकार इस पहल के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को और अधिक अवसर प्रदान करना चाहती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, यह कदम 3-6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस अवधि में मस्तिष्क का 85% विकास होता है।
देश भर में प्रभाव
वर्तमान में देश में लगभग 14.02 लाख आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से 2.9 लाख पहले से ही स्कूलों के साथ सह-स्थित हैं। शेष 11 लाख केंद्रों को भी प्राथमिक स्कूलों के साथ एकीकृत करने की योजना है। देश में करीब 15 करोड़ बच्चे प्री-स्कूल और प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ रहे हैं, जो इस नीति से लाभान्वित होंगे।
में कार्यान्वयन
भीलवाड़ा सहित राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में यह नीति विशेष रूप से प्रभावी होगी। स्थानीय स्तर पर, इस एकीकरण से शिक्षा और पोषण सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, जिससे स्कूल छोड़ने की दर में कमी आएगी। 'जादुई पिटारा' और 'आधारशिला' जैसे उपकरणों का उपयोग खेल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगा, जो बच्चों के लिए सीखने को और रोचक बनाएगा।पोषाहार की चोरी रुकेगी
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति संसाधनों के बेहतर उपयोग और समन्वय को सुनिश्चित करेगी। साथ ही, डेटा डुप्लिकेशन से बचने के लिए पोषण ट्रैकर और UDISE+ डेटाबेस को एकीकृत किया जाएगा। APAAR ID को भी 3-6 वर्ष के बच्चों तक विस्तारित करने की योजना है।यह कदम शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा, जिससे देश के लाखों बच्चों को बेहतर भविष्य मिलेगा।
