‘मंडला 2026’ कार्यशाला का आगाज: शोध के जरिए मुख्यधारा से जुड़ेंगे आदिवासी विद्यार्थी
उदयपुर, । यूजीसी सेंटर फॉर वीमेंस स्टडीज़, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर द्वारा “मंडला 2026ः प्लेसेंटली इन्क्लूसिव” के तहत आयोजित दो दिवसीय शोध पत्र लेखन कार्यशाला का आगाज़ 9 मार्च 2026 को गोल्डन जुबिली गेस्ट हाउस के मीटिंग हॉल में गरिमापूर्ण उद्घाटन सत्र के साथ हुआ। यह कार्यशाला स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है, जिसमें विशेष ध्यान आदिवासी विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र में प्रज्ञा केवलरामानी, आईएएस, प्रो. संजय लोढ़ा तथा माणिक्य लाल वर्मा जनजातीय शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर के निदेशक की विशिष्ट उपस्थिति रही, जिन्होंने युवा पीढ़ी में शोध संस्कृति को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अतिथियों ने अपने उद्बोधनों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शोध एवं अकादमिक लेखन को विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बनाए जाने की आवश्यकता, जनजातीय समुदायों के ज्ञान-विमर्श को मुख्यधारा के अकादमिक मंचों से जोड़ने की महत्ता, तथा लैंगिक न्यायपूर्ण और समावेशी शोध दृष्टि विकसित करने पर बल दिया। प्रज्ञा केवलरमानी, आईएएस ने प्रशासनिक अनुभव के उदाहरणों के साथ बताया कि साक्ष्य-आधारित नीति निर्धारण के लिए गुणवत्तापूर्ण शोध किस प्रकार ज़मीनी हस्तक्षेपों को अधिक प्रभावी बना सकता है। प्रो. लोढ़ा ने युवा शोधार्थियों से अपेक्षा की कि वे शोध के माध्यम से आदिवासी एवं हाशिए के समुदायों से जुड़े वास्तविक प्रश्नों को अकादमिक केंद्र में लाएँ।
उद्घाटन एवं ओरिएंटेशन सत्र में आयोजकों ने विस्तार से बताया कि ‘मंडला 2026’ एक चरणबद्ध कार्यक्रम है। प्रथम चरण के रूप में यह दो दिवसीय शोध पत्र लेखन कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य यूजी और पीजी स्तर के विद्यार्थियों, विशेषकर आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को शोध प्रक्रिया, शोध पद्धति और अकादमिक लेखन की बुनियादी समझ से सशक्त बनाना है। दूसरा चरण जुलाई 2026 में प्रस्तावित युवा स्कॉलर्स सेमिनार होगा, जिसमें प्रतिभागी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। तीसरा चरण शोध पत्रों की समीक्षा, संशोधन और संभावित प्रकाशन की दिशा में मार्गदर्शन एवं मेंटरशिप से जुड़ा होगा, ताकि विद्यार्थी केवल कार्यशाला तक सीमित न रहें, बल्कि अपने शोध कार्य को पूरा करके अकादमिक मंचों तक पहुँचा सकें।
आयोजकों ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत यूजी और पीजी स्तर पर रिसर्च प्रोजेक्ट और अकादमिक लेखन को अनिवार्य बनाए जाने के बाद, विशेष रूप से जनजातीय और हाशिए पर स्थित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए ऐसे संरचित कार्यक्रम अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। उद्घाटन सत्र में यह संदेश स्पष्ट रूप से रखा गया कि ‘मंडला 2026’ के माध्यम से विÜश्विद्यालय न केवल शोध कौशल सिखाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि आदिवासी विद्यार्थियों की आवाज़, अनुभव और दृष्टिकोण को मुख्यधारा के शोध-विमर्श में प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक सशक्त मंच भी तैयार कर रहा है।
पहले दिन के तकनीकी सत्रों में संसाधन व्यक्तियों ने शोध की बुनियादी अवधारणाओं से लेकर उन्नत स्तर तक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। “शोध परिचय एवं शोध पद्धति आधारभूत सिद्धांत” विषय पर सत्र में प्रप्रो. संजय लोढ़ा ने शोध के उद्देश्य, प्रकार, समस्या चयन, परिकल्पना, तथा गुणात्मक और मात्रात्मक पद्धतियों के मूलभूत अंतर पर सरल और संवादात्मक ढंग से चर्चा की । इसके पश्चात “शोध के प्रकार और शोध अभिकल्पना” पर केन्द्रित सत्र में डॉ. नेहा पालीवाल ने शोध अभिकल्पना, सैंपलिंग, वैधता और विश्वसनीयता, तथा क्षेत्रीय-आधारित शोध की विशिष्ट चुनौतियों पर प्रकाश डाला। तीसरे तकनीकी सत्र “डेटा संकलन और विश्लेषण की तकनीके” में डॉ. शिल्पा लोढ़ा द्वारा डेटा संकलन के विभिन्न उपकरणों , साक्षात्कार, फोकस ग्रुप डिस्कशन, ऑब्ज़र्वेशन, सर्वे आदि तथा डेटा के प्रबंधन और प्रारंभिक विश्लेषण के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।
दिन के अंत में आयोजित गतिविधि-आधारित सत्र में प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर शोध समस्या चुनने, उसके लिए उपयुक्त पद्धति और डेटा संकलन तकनीक सुझाने तथा एक संक्षिप्त शोध रूपरेखा तैयार करने का अभ्यास करवाया गया। इस अभ्यास से विद्यार्थियों को यह अनुभव मिला कि सिद्धांत और व्यवहार को किस प्रकार जोड़ते हुए लैंगिक दृष्टि, आदिवासी परिप्रेक्ष्य और स्थानीय संदर्भों को अपने प्रस्तावित शोध पत्रों में समाहित किया जा सकता है। प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपनी शंकाएँ साझा कीं और विशेषज्ञों से निरंतर मेंटरशिप की अपेक्षा व्यक्त की।
कार्यशाला के सत्रों का आयोजन और संचालन सु वि वि की छात्राओं जमीला, ख्याति पालीवाल, पायल माली , दीपिका साल्वी, रानू वैष्नव, अमन साल्वी, भावना गोस्वामी, शाइस्ता रिज़वाना, ललित मेघवाल, विनिशा शर्मा, अभिलाषा डांगी, कृष्णा सेन, महेश रेगर आदि ने लिया।
नुक्कड़ नाटक “प्रॉब्लम नहीं, पीरियड्स है“ की प्रस्तुति एम डी एस हॉस्टल की छात्राओं ने किया जिसमे बहुत ही प्रभावी ढंग से इससे सम्बंधित रूढ़िवादी विचारधारा पर सवाल किया “ चुप्पी तोड़ेंगे, सोच बदलेंगे“ का नारा किया। इसमें विभिन्न विभागों की छात्राओं साक्षी अंजना, विभा शर्मा, राजवी सोनी, मिली गोयल, किंजल, विजयलक्ष्मी वैष्ण्ब, प्रेरणा नागदा, अक्षपारी चांदावत, खुशबू राठी, वैभवी, निष्ठा धाकड़, गुनीषा मकोल ने प्रस्तुति दी।
