‘विकास करें मगर अपनी विरासत को ना छोड़े’’: असम राज्यपाल

By :  vijay
Update: 2025-11-23 10:50 GMT

 

उदयपुर, । असम के माननीय राज्यपाल ने रविवार सुबह शिल्पग्राम का भ्रमण किया साथ ही बंजारा मंच पर लोक कलाओं की प्रस्तुतियां देखी।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि असम के माननीय राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार सुबह शिल्पग्राम का भ्रमण किया। सर्वप्रथम उनका शिल्पग्राम मुख्य द्वार पर तिलक एवं पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। उसके बाद उनको शिल्पग्राम का अवलोकन कराया गया। वहां प्रदर्शित विभिन्न राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियों, स्कल्पचर पार्क, ग्रामीण परिवेश तथा वहां स्थित हस्तशिल्प स्टॉलों के साथ ही आगामी दिनों में आने वाले शिल्पग्राम उत्सव की तैयारियों के बारे में बताया। इसके बाद बंजारा मंच पर लोक कलाकारों द्वारा लंगा मांगणियार, कालबेलिया, भपंग, गोंधल, डांगी आदि लोक संस्कृतियों की प्रस्तुतियां देखी तथा कलाकारों से संवाद भी किया। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश चांदवानी ने किया।

इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर के सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, भूपेन्द्र सिंह कोठारी, दयाराम सुथार, सुनील निमावत, सिद्धांत भटनागर, दीपक नवलखा, महेन्द्र सिंह गहलोत, कन्हैयालाल डांगी, प्रदीप मेघवाल तथा केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे।

राज्यपाल आशीर्वचनः

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर के माध्यम से मैंने लोक कला का एक अद्भुत प्रदर्शन देखने का सौभाग्य प्राप्त किया। आज सुबह माता दर्शन के पश्चात मेरे इन कलाकारों ने जो विविध प्रस्तुतियां दी मन को मोह लिया। आदरणीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी कहा करते है कि हम विकास करें मगर अपनी विरासत को ना छोड़े। मैं समझता हूं विकास के साथ हमारी विरासत की संस्कृति का जो अद्भुत प्रदर्शन किया है इसके लिए मैं इन कलाकारों को बहुत बधाई देता हूं। अधिकारियों को बहुत-बहुत शुभकाना करता हूं। एक पूरे मिनी भारत का जो अद्भुत झलक देखने का मुझे अवसर दिया है, मन गदगद हुआ। 

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