आयड़ तीर्थ में गूंजे गुरुदेव के जयकारे: आचार्य जगच्चन्द्र सूरि की प्रतिमा और 8 आचार्यों की चरण पादुकाएं स्थापित
उदयपुर। तपागच्छ की उद्गम स्थली ऐतिहासिक आयड़ तीर्थ में गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में 800 वर्ष प्राचीन उपाश्रय साधना स्थली पर तपा विरुद्ध धारक आचार्य जगच्चन्द्र सूरि महाराज की भव्य गुरु प्रतिमा एवं आठ महान आचार्यों की प्राचीन चरण पादुकाओं (पगलयाजी) की मंगल स्थापना की गई।
800 साल पुराने साधना स्थल पर गुरु मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा:
महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि भगवान महावीर के 44वें पट्टधर और आजीवन आयंबिल तप के घोर तपस्वी आचार्य जगच्चन्द्र सूरि महाराज की प्रतिमा उन्हीं के प्राचीन साधना स्थल पर स्थापित की गई है। इसके साथ ही आचार्य सोमप्रभसूरि, आचार्य मणिरत्न सूरि, महो देवभद्रगणि, आचार्य देवेंद्र सूरि, आचार्य विजयचंद्रसूरि, आचार्य रत्नाकर सूरि और आचार्य विद्यामण्डन सूरि महाराज की चरण पादुकाओं की भी विधि-विधान से स्थापना की गई। यह पूरा महोत्सव पद्मश्री विभूषित गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंदसूरि महाराज की पावन निश्रा में संपन्न हुआ।
संगीतमय दादा गुरुदेव की बड़ी पूजा:
प्रतिष्ठा महोत्सव के पश्चात तपागच्छीय चार दादा गुरुदेवों की 'बड़ी पूजा' का भव्य और संगीतमय आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भक्ति भाव से सराबोर नजर आए। आयड़ तीर्थ के जीर्णोद्धार और विकास की इस कड़ी में इस आयोजन को मील का पत्थर माना जा रहा है।
ये रहे उपस्थित:
इस ऐतिहासिक अवसर पर महासभा के कुलदीप नाहर, सतीश कच्छारा, अभय नलवाया, चतर सिंह पामेचा, राजेन्द्र जवेरिया, राजेश जावरिया, राकेश चेलावत, रविन्द्र पंजाबी, भूषण भाई शाह, अशोक जैन, संजय पंजाबी, चिमनलाल गांधी, रमेश सिरोया, अनिल मेहता और महेश कोठारी सहित बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु उपस्थित थे।