रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उदयपुर में भूपाल नोबल संस्थान के 104वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया

Update: 2026-01-02 15:00 GMT

उदयपुर,। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को उदयपुर दौरे पर रहे। इस अवसर पर वे शहर के बीएन कॉलेज मैदान पहुंचे, जहाँ विद्या प्रचारिणी सभा द्वारा संचालित भूपाल नोबल संस्थान के 104वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह में चित्तौड़गढ़ सांसद  सीपी जोशी, उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, नाथद्वारा विधायक एवं मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य  विश्वराज सिंह मेवाड़, सलूम्बर विधायक शांता देवी, समाजसेवी अनिल सिंह सहित संस्थान के पदाधिकारी, गणमान्य अतिथि, शैक्षणिक स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में अपनी कृतियों के कारण विभूषित होता है। उन्होंने स्वयं को मूल रूप से शिक्षक बताते हुए कहा कि उन्हें बच्चों से संवाद करने में विशेष आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण का महत्व समझाते हुए कहा कि जब लक्ष्य तय कर लिया जाए तो उसकी प्राप्ति तक न तो विचलित होना चाहिए और न ही टूटना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों को “इंस्टीट्यूशन ऑफ इंस्टीट्यूशंस” बताते हुए आत्मनिर्भरता को जीवन की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को स्वाभिमान और अहंकार के अंतर को समझने की सीख देते हुए कहा कि स्वाभिमान की भावना अहंकार में नहीं बदलनी चाहिए। अहंकार से मुक्त होने पर ही अनंत सुख की प्राप्ति संभव है।

उन्होंने मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के महाराणा भूपाल सिंह को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि उनकी प्रतिबद्धता सदैव “इंडिया फर्स्ट” रही। विलय के दौर में उनका स्पष्ट संदेश था “आई एम विद इंडिया।” रक्षा मंत्री ने कहा कि आज का भारत अपने अतीत और महान संस्कृति पर गर्व करता है। यह तपोभूमि महान विद्वानों की जन्मस्थली रही है और प्राचीन काल से ही भारतीय ज्ञान प्रणाली अत्यंत समृद्ध रही है।

श्री सिंह ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़ा मन रखने और संकीर्ण सोच से दूर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को बढ़ावा देती है तथा समग्र दृष्टिकोण विकसित करती है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षक का सम्मान सर्वाच्च रहा है। उन्होंने कहा कि जीवन में जो झुकता है, वही उठता है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की कक्षाओं में आकार लेता है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है जो संकट आने पर डरें नहीं, बल्कि समाधान खोजें। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के विश्वविद्यालय कुशल मानव संसाधन तैयार कर रहे हैं, लेकिन ज्ञान के साथ विनय, चरित्र, धर्म और नैतिकता का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि नैतिकता से विहीन शिक्षा समाज के किसी काम नहीं आती।

उन्होंने व्हाइट कॉलर टेररिज्म को चिंताजनक बताते हुए शिक्षा व्यवस्था में इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, उसकी प्रगति रुक जाती है, इसलिए अपने भीतर के विद्यार्थी को सदैव जीवित रखना चाहिए। ज्ञान के सही उपयोग के लिए विवेक आवश्यक है और जिसके पास ज्ञान के साथ विवेक होता है, वही समाज के लिए कल्याणकारी कार्य कर सकता है। अपने संबोधन के समापन में रक्षा मंत्री ने कहा कि रिसर्च का अंतिम लक्ष्य धरातल पर उपयोगी परिवर्तन लाना होना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी 15दृ20 वर्षों में भारत हथियारों के मामले में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बन जाएगा और वर्ष 2030 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक पटल पर उभरेगा।

इससे पूर्व समारोह में संस्थान की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से रक्षा मंत्री का पारंपरिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि मेवाड़ सदैव से देश-दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। वहीं चित्तौड़गढ़ सांसद  सीपी जोशी ने भूपाल नोबल्स संस्थान को “राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशाला” बताते हुए कहा कि शिक्षा और सुरक्षा किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है। उन्होंने कहा कि सरकार नई पीढ़ी को आदर्श और संस्कारवान बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, इसी उद्देश्य से आगामी दिनों में महाराणा प्रताप की स्मृति में प्रदेशभर के विद्यालयों में विशेष आयोजन किए जाएंगे।

नाथद्वारा विधायक  विश्वराज सिंह मेवाड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराणा भूपाल सिंह के समय लिखित पुस्तकों में शिक्षा के मूल सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है, जिससे उस दौर में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल गलत ऐतिहासिक तथ्यों के सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। समारोह के दौरान भूपाल नोबल्स संस्थान हेतु उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी प्रदान किए गए।

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