कलेक्ट्रेट सभागार में जिला परिवेदना निस्तारण समिति की बैठक आयोजित

Update: 2026-02-10 13:36 GMT

भीलवाड़ा। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार सायं जिला परिवेदना निस्तारण समिति (डीजीआरसी) की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर  जसमीत संधू द्वारा की गई, जिसमें मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना अंतर्गत लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए ।

बैठक में न्यू इंडिया एश्योरेंस (एनआईए) से डॉ. विकास, मनोज मीणा, जिला आरसीएच अधिकारी डॉ. अभिनव निर्वाण सहित जिले के प्रमुख निजी चिकित्सालयों के प्रतिनिधियों, चिकित्सा विशेषज्ञों तथा डीपीओ योगेश वैष्णव, डीपीसी (मा योजना) प्रदीप दाधीच सहित स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अनुभाग अधिकारियों ने सहभागिता की।

बैठक के दौरान निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों द्वारा अपने अपने प्रकरणों की परिवेदनाएं जिला कलेक्टर को सुनाई। इस दौरान जिला कलेक्टर  जसमीत सिंह संधू ने अस्पतालों में आयुष्मान आरोग्य योजना से संबंधित टीआईडी जनरेट करने, भुगतान में देरी होने सहित क्लेम रिजेक्शन के कारणों को पता कर अविलंब निस्तारण करने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये तथा योजना में आमजन को स्वास्थ्य लाभ देने में क्लेम रिजेक्शन न हो इसके लिए किसी भी प्रकार की समस्या होने पर निर्धारित माध्यमों से शिकायत दर्ज कराएं, ताकि उसका शीघ्र समाधान समय पर सुनिश्चित किया जा सके।

जिला कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ टीआईडी जनरेट कर शीघ्र उपलब्ध कराया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य आमजन को त्वरित राहत देना है, इसलिए सभी संबंधित संस्थान आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। बैठक के दौरान जिला कलेक्टर ने अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, आवश्यक दस्तावेजों के शीघ्र सत्यापन तथा प्रकरणों के त्वरित निस्तारण हेतु भी चर्चा की गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने बैठक में विभिन्न प्रकरणों की स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि जिले में आयुष्मान आरोग्य योजना के अंतर्गत उपचार से संबंधित शिकायतों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने निजी चिकित्सालयों को निर्देशित किया कि उपचार प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखें तथा रोगियों एवं परिजनों को सभी आवश्यक जानकारियां समय पर उपलब्ध कराएं।

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