उदयपुर, । आदिनाथ चेरिटेबल ट्रस्ट, सेक्टर 11, सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर, आदिनाथ चेरिटेबल ट्रस्ट एवं पुलक मंच के संयुक्त तत्वावधान में आदिनाथ भवन, सेक्टर 11 में प्रवासरत राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर महाराज के सानिध्य में सोमवार को सेक्टर 11 स्थित जवाहर जैन शिक्षण संस्थान में भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ । इस पावन अवसर पर राष्ट्रसंत पुलकसागर क्षुल्लक प्रतिभा सागर, क्षुल्लक पूर्णिमा सागर को मुनि दीक्षा और ब्रह्मचारी शोभा दीदी को आर्यिका दीक्षा प्रदान की । राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद फांदोत एवं कार्यक्रम संयोजक अशोक शाह ने बताया कि इस आयोजन में सम्पूर्ण भारत वर्ष से हजारों भक्तों की जनमैदिनी उमड़ पड़ी, यह आयोजन न केवल उदयपुर बल्कि सम्पूर्ण मेवाड़ के लिए एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक पर्व बन गया ।
राष्ट्रसंत आचार्य पुलकसागर के जयकारों से संपूर्ण पांडाल गुंजायमान हो गया । प्रतिभासागर एवं पूर्णिमा सागर क्षुल्लक अवस्था से मुनि बने वहीं शोभा दीदी क्षुल्लिका प्रियवन्दनामति बनी । कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई, ध्वजारोहण क्रिया पण्डित सम्राट शास्त्री ने करवाई, उसके बाद अतिथियों, समाज के श्रेष्ठी जन एवं वर्षायोग कमेटी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की । मंगलगीत मंगलाचरण खम्मा घणी, दीक्षार्थियों को खम्मा घणी गीत से समाज की बालिकाओं एवं महिलाओं ने किया। नव दीक्षार्थी द्वारा परिवार से आचार्यश्री संघ से समाजजन से सभी से क्षमा याचना की गई दीक्षार्थियों ने आचार्यश्री से दीक्षा हेतु निवेदन किया, जिस पर आचार्य ने दीक्षा की स्वीकृति दी। नव दीक्षार्थी शोभा दीदी का केश लोचन हुआ। तीनों दीक्षार्थियों की दीक्षा संस्कार विधि प्रारंभ हुई, आचार्य पुलकसागर महाराज ने अपने कमलों से दीक्षार्थियों के मस्तक पर लेखन किया और 108 मंत्रों से संस्कार प्रारंभ कर दीक्षा विधि प्रारंभ की और केशलोच के साथ सभी के मन की दीक्षा लेने के प्रति इच्छा को पूछते हुए दीक्षा प्रदान की।
आचार्य पुलक सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि दीक्षा देने के पूर्व एक और अंतिम बार पूछा जाता है कि क्या आप इस मार्ग पर चलने को तैयार है? क्योंकि जीवन का सर्वोच्च त्याग और आत्मकल्याण का द्वार है, जिसमें घर परिवार और सारी सुख सुविधाएं छोड़ कर इस मार्ग पर आना पड़ता है, जब कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह समूचे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। युगादि ब्रह्मा भगवान ऋषभदेव ने अपने जीवन में नग्नता को प्राप्त किया और यह क्रम अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर तक चला । अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रावक-श्राविकाएँ एवं हजारों श्रद्धालु शामिल हुए । प्रचार सचिव विप्लव कुमार जैन ने बताया कि इस अवसर पर संघपति प्रदीप मामा, पूर्व उपमहापौर पारस सिंघवी, महामंत्री कमलकांत जोलावत, कोषाध्यक्ष सुरेश वखारिया, सह संयोजक महावीर सिंघवी, नीलकमल अजमेरा, सुमेश वाणावत, सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे । संपूर्ण कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. राजेश देवड़ा ने किया । कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के लिए भव्य स्वामीवात्सल्य का आयोजन हुआ।