राजस्थान ऋतु वसंत’ उत्सव वायलिन- दिलरुबा की जुगलबंदी पर झूमे और ओडिसी पर थिरके मन

Update: 2026-02-21 16:30 GMT


उदयपुर  राजस्थान के उदयपुर में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से चल रहे तीन दिवसीय ‘ऋतु वसंत’ उत्सव के दूसरे दिन शनिवार को प्रसिद्ध वायलिन वादक गुलजार हुसैन और दिलरुबा वादक ने कर्नाटक संगीत पद्धति के राग हंस ध्वनि में जुगलबंदी कर शास्त्रीय संगीत के रसिकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि इसके साथ ही कविता द्विवेदी एंड ग्रुप ने ओडिसी नृत्य में शिव-सती और कामदेव के प्रसंगों को मुक्ताकाशी मंच पर जीवंत कर माहौल में क्लासिकल के साथ-साथ आध्यात्मिकता के रंग भी घोल दिए, जो दर्शकों के दिल को छू गए।

देश-विदेश में अपने संगीत से छा चुके जयपुर के वायलिन वादक गुलजार हुसैन और प्रदेश के ख्यातनाम दिलरुबा वादक मोहम्मद उमर ने वायलिन-दिलरुबा की दिमाग से दिल तक उतरी जुगलबंदी पेश कर शिल्पग्राम में शनिवार शाम संगीतमयी बना दिया। इस कर्णप्रिय जुगलबंदी में इन मशहूर मूसीकारों (संगीतकार) ने कर्नाटक संगीत का सुमधुर राग हंस ध्वनी के विभिन्न अंगों को पेशकर श्रोताओं के दिलों को छू लिया। इन्होंने आलाप के बाद राग हंस ध्वनी की पहली बंदिश मध्यलय झपताल 10 मात्रा में प्रस्तुत की तो शास्त्रीय संगीत के रसिक वाह-वाह कर उठे।

इसके साथ ही मशहूर कथक नृत्यांगना कविता द्विवेदी के निर्देशन में ओडिसी नृत्य की तीन भावपूर्ण कड़ियां प्रस्तुत की गईं, जिनमें भक्ति और प्रेम के शिव एवं कामदेव से जुड़े प्रसंगों को मंच पर साकार कर दिया। इस पेशकश में शास्त्रीय नृत्य, संगीत और भारतीय पौराणिक परंपरा का सुंदर समन्वय साक्षात हुआ। नृत्य का आगाज “ॐ नमः शिवाय” से हुआ, इस पंचाक्षरी मंत्र के पंचाक्षरों यथा न, म, शि, वा और य को पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश तत्वों से जोड़ते हुए गहन दार्शनिक अर्थ में प्रस्तुत किया तो दर्शक दाद दिए बगैर नहीं रह सके।

दूसरी प्रस्तुति “अनंग रंग” वसंत और प्रेम के देवता कामदेव की कथा पर आधारित रही। शिव के क्रोध से कामदेव के भस्म होने और पुनर्जन्म के माध्यम से प्रेम के पुनर्सृजन की कथा ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, अंतिम प्रस्तुति “जय मां यमुना” रही, जिसमें यमुना नदी के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया।

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