वसुंधरा राजे-मोहन भागवत मुलाकात:राजनीति में तूफान, BJP में 'रानी' की वापसी का संकेत?
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और RSS प्रमुख मोहन भागवत की जोधपुर में हुई 25 मिनट की मुलाकात ने राजनीति में तूफान ला दिया है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब BJP में लीडरशिप को लेकर उथल-पुथल मची हुई है, और RSS का प्रभाव फिर से चर्चा में है। 3 सितंबर 2025 को जोधपुर के लालसागर क्षेत्र में RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक से ठीक पहले हुई यह बैठक, राजे की 'वनवास' वाली टिप्पणियों को नया अर्थ दे रही है।
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में देखें तो BJP 2024 लोकसभा चुनावों के बाद से स्थिरता की तलाश में है। मोदी सरकार की तीसरी पारी में अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे नेताओं की भूमिका मजबूत है, लेकिन RSS के प्रभाव से पार्टी के फैसले प्रभावित होते रहे हैं। हाल ही में भागवत ने दिल्ली में RSS शताब्दी समारोह में साफ किया कि संघ BJP के फैसलों में सिर्फ सलाहकारी भूमिका निभाता है, न कि हस्तक्षेप करता है। फिर भी, राजे की मुलाकात को RSS की ओर से उन्हें BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए बैकिंग के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गजों से राइवलरी बढ़ सकती है, और मोदी-शाह गुट में असंतोष पैदा हो सकता है।
राजस्थान में BJP की हालिया हार के बाद राजे को साइडलाइन किया गया था, लेकिन उनकी लोकप्रियता बरकरार है। हाल में PM मोदी से उनकी मुलाकात ने उपराष्ट्रपति पद की अटकलों को हवा दी। अगर राजे अध्यक्ष बनती हैं, तो वह BJP की पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगी, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे राजस्थान में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है, जहां कांग्रेस की चुनौती बढ़ रही है।
यह मुलाकात सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि राजनीतिक शतरंज की चाल है। क्या 'रानी' राजे केंद्र में नई भूमिका में लौटेंगी, या यह RSS-BJP गठजोड़ की नई कहानी का प्रारंभ है? आने वाले दिन रोमांचक होंगे, क्योंकि 2025 में विधानसभा चुनावों की तैयारी में BJP को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है