प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 57वां पुण्य स्मृति दिवसः शाहपुरा में विश्व शांति का संदेश गूंजा

Update: 2026-01-19 05:59 GMT

शाहपुरा मूलचन्द पेसवानी |शाहपुरा के गांधीपुरी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में रविवार को आध्यात्मिक उल्लास और शांति के वातावरण के बीच प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 57वां पुण्य स्मृति दिवस विश्व शांति दिवस के रूप में श्रद्धा और भाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनुयायियों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की।

इस अवसर पर सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. संगीता बहन ने ब्रह्मा बाबा के प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे अलौकिक प्रतिभा के धनी होने के साथ-साथ हीरे-जवाहरात के प्रतिष्ठित व्यापारी थे। उन्होंने जीवन में 12 गुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया, लेकिन अंततः परमात्मा शिव के दिव्य कार्य में अपना तन, मन और धन पूर्णतः समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि 18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा देह त्याग कर अव्यक्त हुए, इसी कारण इस दिन को अव्यक्त दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

बी.के. संगीता बहन ने कहा कि ब्रह्मा बाबा का सबसे बड़ा योगदान नारी सशक्तिकरण रहा। जिस दौर में नारी को तिरस्कार और यातनाओं का सामना करना पड़ता था, उस समय परमात्मा ने ब्रह्मा बाबा के माध्यम से माताओं को सम्मान और नेतृत्व प्रदान किया। ‘वंदे मातरम’ की भावना को साकार करते हुए उन्होंने मातृशक्ति को समाज के केंद्र में स्थापित किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित भाई-बहनों को राजयोग की अनुभूति कराई गई। शांत, सात्त्विक वातावरण में सभी ने योगयुक्त होकर लगभग एक घंटे तक मेडिटेशन किया और पूरे विश्व को सकारात्मक ऊर्जा यानी ‘सकाश’ प्रदान की। इसके पश्चात सभी ने ब्रह्मा बाबा के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

गौरतलब है कि विश्व शांति और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना में उल्लेखनीय योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ब्रह्माकुमारीज संस्था को शांतिदूत पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

सेवाकेंद्र प्रभारी ने बताया कि इस संस्था की स्थापना स्वयं परमपिता परमात्मा शिव ने ब्रह्मा का तन का आधार लेकर की थी और ब्रह्मा बाबा ने संस्था की पूरी बागडोर माताओं-बहनों को सौंप दी। इसी कारण संस्था का नाम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रखा गया।

उन्होंने बताया कि इस पुण्य दिवस पर देश-विदेश के सभी सेंटरों पर पूरे दिन योग तपस्या चलती है, संपूर्ण विश्व को शांति का दान दिया जाता है और सभी मनुष्य आत्माओं के लिए मंगलकामनाएं की जाती हैं कि सब सुखी रहें, सब खुश रहें।

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