टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर रोक की मांग: 'राइट टू कम्युनिकेशन' को उपभोक्ता अधिकार बनाने की गूंज
भीलवाड़ा |उपभोक्ताओं का अधिकार है - "राइट टू कम्युनिकेशन " और इस अधिकार को टेलिकॉम कंपनियां नहीं छीन सकती है ! उपभोक्ता अधिकार समिति राजस्थान भीलवाड़ा मानवाधिकार केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ अशोक सोडाणी के नेतृत्व में विगत काफी समय से भारत सरकार से लगातार टेलीकॉम कम्पनियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग कर रही है ! इस मांग को संसद में पिछले सत्र में सांसद राघव चढ़्ढा ने भी उठाया है !
उपभोक्ताओं का अधिकार है - "राइट टू कम्युनिकेशन " इसके अन्तर्गत उपभोक्ता अधिकार समिति मानवाधिकार प्रकोष्ठ द्वारा मांग की जा रही थी कि रिचार्ज खत्म होने के बाद आउटगोइंग कॉल बन्द की जा सकती है लेकिन इनकमिंग फोन और मैसेज कम से कम एक साल तक बंद नही होने चाहिए। क्योंकि तमाम चीजें सरकार ने मोबाइल से लिंक कर रखी है चाहे वह आधार कार्ड हो, बैंक अकाउंट हो कोई भी ओटीपी हो, मोबाइल पर ही आते हैं !
"राइट टू वैल्यू सिस्टम " उपभोक्ताओं का अधिकार है , इसके अन्तर्गत उपभोक्ता को उसके द्वारा खरीदी हुई सेवा का पूरा मूल्य मिलना चाहिए ! साल में 12 महिने होते हैं पूरी दुनिया में हर चीज मंथली कैलेंडर बेसिस पर है, चाहे वह तनखा हो, किराया हो, लोन की ईएमआई किश्तें हो लेकिन टेलिकॉम कंपनियों ने 28 दिन का रिचार्ज सिस्टम करके, छुपे हुए तरीके से 13 महीने बना दिये है एक साल के ! एक साल में 365 दिन होते हैं, 28 दिन के हिसाब से 13 बार रिचार्ज करने पर 364 दिन होते हैं ! इस तरहा साल में 12 महीने होने पर भी 13 महीनों का रिचार्ज कराना पड़ता है जो स्पष्टतः
जिन मां बाप के , बुजुर्गों के फोन आउटगोइंग उपयोग नहीं आते हैं, लेकिन उनके बच्चों रिश्तेदारों के, परिचितों के फोन आने पर वे बात कर सकें इस हेतु " राईट टू सोशियल सिस्टम " के अन्रतर्गत ऐसे उपभोक्ताओं के लिए, एक न्यूनतम मूल्य आधारित 100 /-रूपये सालाना का इनकमिंग सुविधा वाला रिचार्ज प्लान होना ही चाहिए !
उपभोक्ता अधिकार समिति मानवाधिकार प्रकोष्ठ केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ अशोक सोडाणी द्वारा समिति के केन्द्रीय महासचिव एडवोकेट प्रहलाद राय व्यास, केन्द्रीय अध्यक्ष सुनील राठी, केन्द्रीय महिला अध्यक्ष एवं नगरपरिषद भीलवाड़ा की पूर्व सभापति मधु जाजू के नेतृत्व में आज पुन: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार को तथा ट्राई को ज्ञापन पत्र भेजकर भारत के उपभोक्ताओं के लिए इन मांगों पर विचार करने और सभी टेलिकॉम कंपनियों को इनको लागू करने हेतु पाबन्द करने की मांग की है !
