वीआईपी नंबर मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग की कार्रवाई पर लगाई अंतरिम रोक
जोधपुर (हलचल)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित ‘वीआईपी नंबर घोटाले’ में प्रदेशभर के अधिकारियों, कर्मचारियों और वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने परिवहन विभाग द्वारा जारी उन आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिनके तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत दोष तय किए बिना किसी के भी खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने जोधपुर और पाली के पूर्व डीटीओ (DTO) सहित 17 याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार, गृह सचिव, परिवहन आयुक्त और डीजीपी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 1989 से पहले जारी पुराने वाहन नंबरों के नवीनीकरण, संरक्षण (Retention) और 2013 से पूर्व के वाहनों के डेटा को VAHAN सिस्टम में दर्ज करने से जुड़ा है। विभाग की जांच समिति ने इसमें करीब 400 से 600 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान जताते हुए अनियमितता का आरोप लगाया था।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां और आदेश:
* कार्रवाई पर रोक: कोर्ट ने 20 नवंबर और 9 दिसंबर 2025 के उन आदेशों पर रोक लगाई है जिनके आधार पर एफआईआर होनी थी।
* एफआईआर पर स्टे: यदि इन आदेशों के तहत कोई एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तो उस पर भी अगली सुनवाई तक कार्रवाई स्थगित रहेगी।
* प्राकृतिक न्याय: कोर्ट ने माना कि बिना व्यक्तिगत दोष तय किए या बिना सुनवाई का अवसर दिए सामूहिक रूप से आपराधिक कार्रवाई करना कानून के विरुद्ध है।
याचिकाकर्ताओं की दलील: अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने तर्क दिया कि विभाग की जांच रिपोर्ट अपूर्ण है। 1989 से पहले तीन अंकों के नंबर 'वीआईपी' श्रेणी में नहीं थे, विभाग खुद इनके ट्रांस्फर की अनुमति देता रहा है और शुल्क भी वसूलता रहा है। ऐसे में अचानक इसे घोटाला बताकर एफआईआर दर्ज करना गलत है।
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