सब कुछ मुफ्त देंगे तो लोग काम क्यों करेंगे?": फ्रीबीज कल्चर पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Update: 2026-02-19 18:17 GMT


​नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'फ्रीबीज कल्चर' (मुफ्त की रेवड़ियां) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकारें लोगों को सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, गैस और बिजली उपलब्ध कराती रहेंगी, तो इससे नागरिकों में काम करने की आदत खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सरकारों का प्राथमिक ध्यान रोजगार सृजन पर होना चाहिए।

​भेदभाव रहित मुफ्त सुविधाओं पर सवाल

​यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति पर विचार किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव था।

​CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा:

​"गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना समझ में आता है, लेकिन बिना किसी फर्क के समाज के हर वर्ग को मुफ्त सुविधाएं देना सही नहीं है। इससे देश की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।"

​राजस्व घाटे और विकास की अनदेखी

​सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की आर्थिक स्थिति पर प्रहार करते हुए कहा कि देश के अधिकांश राज्य पहले से ही भारी राजस्व घाटे से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद, राजनीतिक लाभ के लिए विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे को नजरअंदाज कर मुफ्त की घोषणाएं की जा रही हैं। बेंच ने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति भविष्य में आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।

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