बेघर हुई घुमंतू महिला की गुहार:: "साहब! भीख मांगकर लौटे तो आशियाना जमींदोज मिला, अब बच्चों को लेकर कहां जाएं?"

Update: 2026-04-03 08:36 GMT

 भीलवाड़ा BHN. शहर के पटेलनगर इलाके में एक गरीब घुमंतू परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिछले 15 सालों से जिस झोपड़ी को अपना घर मानकर इन्द्रा बागरिया अपने पांच मासूम बच्चों के साथ रह रही थी, नगर निगम की कार्रवाई ने उसे मलबे में तब्दील कर दिया। अब यह परिवार भीषण गर्मी और आने वाले मानसून के डर से थर-थरा रहा है। शुक्रवार को पीड़िता ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय और मुआवजे की गुहार लगाई है।

15 साल का आशियाना, चंद मिनटों में हुआ साफ

देवनारायण सर्किल, याशिका हॉस्पिटल के पास रहने वाली इन्द्रा पत्नी जगदीश बागरिया ने बताया कि वह घुमंतू परिवार से ताल्लुक रखती है। वह अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों के साथ पिछले डेढ़ दशक से इसी स्थान पर झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर कर रही थी। इसके अलावा उसके पास रहने के लिए दुनिया में और कोई ठिकाना नहीं है।

कश्मीर से लौटी तो सब कुछ खत्म मिला

पीड़िता ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह अपने बच्चों का पेट पालने के लिए पिछले कुछ समय से कश्मीर में भीख मांगने गई हुई थी। जब 4-5 दिन पहले वह वापस भीलवाड़ा लौटी, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां न झोपड़ी थी और न ही उसका घरेलू सामान। पूछताछ करने पर पता चला कि नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर उसकी झोपड़ी को ध्वस्त कर दिया और सारा सामान भी गायब हो गया।

कलेक्टर से गुहार: "मुआवजा दिलाओ, सिर छिपाने को छत दो"

कलेक्टर को सौंपे पत्र में इन्द्रा ने बताया कि उसके पास अब न तो रहने की जगह है और न ही दोबारा आशियाना बनाने के लिए पैसे। भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और जल्द ही बरसात का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में वह अपने पांच बच्चों को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़िता ने मांग की है कि नगर निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ जांच की जाए, उसे उचित मुआवजा दिलाया जाए और रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए।

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