तेल संकट से राहत: अमेरिका ने भारत को दी रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की विशेष छूट
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट (Waiver) देने का औपचारिक एलान किया है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल का प्रवाह बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।
समुद्र में अटके टैंकरों को मिला रास्ता
पिछले कुछ समय से कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं के कारण करोड़ों बैरल रूसी तेल से लदे टैंकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फंसे हुए थे। बीमा और पोर्ट एंट्री जैसी तकनीकी बाधाओं के चलते भारतीय कंपनियां इस तेल को उतारने से हिचक रही थीं।
* ताजा छूट की सीमा: यह छूट 5 मार्च 2026 से पहले लोड किए गए तेल जहाजों पर लागू होगी और 3 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगी।
* उद्देश्य: अमेरिका का मानना है कि यह एक 'स्टॉप-गैप' (अस्थायी) उपाय है ताकि ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को 'बंधक' बनाने की कोशिशों को विफल किया जा सके।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40% हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण इस क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। भारत के पास फिलहाल लगभग 25 दिनों का ही कच्चा तेल भंडार शेष है, ऐसे में रूसी तेल का आना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका की शर्त और रणनीति
हालांकि अमेरिका ने यह राहत दी है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया है कि भारत को भविष्य में अमेरिकी तेल के आयात में बढ़ोतरी करनी होगी। सचिव बेसेंट के अनुसार, यह संक्षिप्त छूट रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं पहुँचाएगी क्योंकि यह केवल उन्हीं जहाजों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में खड़े हैं।
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