मौत का जखीरा बेनकाब, घरों में बन रहा था बारूद, अवैध विस्फोटक फैक्ट्री का पर्दाफाश

Update: 2026-01-17 13:28 GMT

 टोंक। जिले में कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती देते हुए अवैध विस्फोटक सामग्री का खतरनाक कारोबार खुलेआम चल रहा था। देवली पुलिस की जिला विशेष टीम ने शुक्रवार देर शाम बड़ी कार्रवाई करते हुए टोंक और देवली शहर में मौत का सामान तैयार करने और बेचने वाले नेटवर्क को उजागर कर दिया। पुलिस ने तीन अलग अलग मामलों में तीन आरोपितों को दबोचते हुए भारी मात्रा में बारूद, हथियारों के पुर्जे और विस्फोटक सामग्री जब्त की है, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना के निर्देश पर जिले में अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में डीएसटी टीम ने टोंक के शोरगरान मोहल्ला निवासी मोहम्मद अतीक पुत्र अलाउद्दीन, देवली के राजू पुत्र नारायणलाल लोहार तथा देवली के कीर मोहल्ला निवासी नाज मोहम्मद पुत्र अब्दुल गनी को गिरफ्तार किया।

घर में चल रही थी बारूद बनाने की फैक्ट्री

पुलिस जांच में सामने आया कि मोहम्मद अतीक अपने घर में ही बारूद तैयार करता था। उसके कब्जे से बंदूक में इस्तेमाल होने वाले ढाई किलो छर्रे, 32 किलो गन पाउडर बारूद, 32 किलो पोटाश, 55 किलो शौरा, 44 किलो सफेद गन पाउडर, 200 कोर्डेक्स वायर, एक एयर गन, 138 पी कैप्स और 7 गनचाप बरामद किए गए। यह खुलासा इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

देवली में हथियारों की अवैध मंडी

देवली में पकड़े गए आरोपित राजू पुत्र नारायणलाल लोहार के पास से बंदूक ट्रिगर 26, बंदूक प्लेट 35, बंदूक मक्खी 163, बंदूक टोपी 840, 21 किलो गन पाउडर, 21 बंदूक कबानी, दो नाली बंदूकें, एक दोनाली बंदूक, 3 लाख 3 हजार 50 रुपए नकद और 6 तलवारें बरामद की गईं। आरोपित देवली में खराद की दुकान की आड़ में हथियारों के पुर्जे और बारूद बेच रहा था।

तीसरे आरोपी के पास भी मिला बारूद

तीसरे आरोपी नाज मोहम्मद पुत्र अब्दुल गनी निवासी कीर मोहल्ला देवली के पास से भी 1 किलो 250 ग्राम बारूद जब्त किया गया है। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और अलग अलग इलाकों में विस्फोटक सामग्री की सप्लाई कर रहा था।

खुद ही करते थे सप्लाई

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित राजू और मोहम्मद अतीक खरीदारों तक स्वयं विस्फोटक सामग्री पहुंचाते थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि किसान फसलों को मवेशियों से बचाने के नाम पर धमाके करने के लिए यह बारूद लेते थे, वहीं जंगलों में अवैध शिकार करने वाले शिकारी भी इनसे छर्रे, टोपी और बारूद खरीदते थे।

जांच में और खुलासों की उम्मीद

पुलिस अब इस अवैध विस्फोटक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और शिकारियों की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जिले में अवैध हथियार और विस्फोटक कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी।

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