राजस्थान पंचायत चुनाव 2026:: ईवीएम की जगह मतपत्र से होगा चुनाव, बदल जाएगी पूरी प्रक्रिया
जयपुर । आगामी पंचायतीराज चुनाव इस बार एक बड़े बदलाव के साथ होने जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार, इस बार पंच और सरपंच दोनों ही पदों के चुनाव ईवीएम (EVM) के बजाय मतपत्र (Ballot Paper) के जरिए कराए जाएंगे। यह बदलाव न केवल चुनाव की तकनीक में है, बल्कि इसका सीधा असर चुनाव की रफ्तार और परिणामों की घोषणा पर भी पड़ेगा।
ऐसा होगा इस बार का मतपत्र (बैलेट पेपर):
निर्वाचन आयोग ने मतपत्रों के रंग और रूपरेखा तय कर दी है ताकि मतदाताओं को भ्रम न हो:
पंच का मतपत्र: यह गुलाबी रंग के कागज पर मुद्रित होगा।
सरपंच का मतपत्र: यह सफेद रंग के कागज पर छपेगा।
आकार और विवरण: मतपत्र की चौड़ाई 4 इंच होगी। ऊपरी हिस्से में काली सीमारेखा होगी, बाईं ओर क्रमांक और दाईं ओर पंचायत वार्ड की जानकारी हिंदी में दी जाएगी।
चिह्न और नोटा: अभ्यर्थियों के नाम बाईं ओर और उनके आवंटित चुनाव चिह्न दाईं ओर होंगे। अंत में 'नोटा' (None of the Above) का विकल्प भी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेगा।
ईवीएम से बैलेट की वापसी: क्या पड़ेगा प्रभाव?
पिछले एक दशक से ईवीएम से हो रहे चुनावों के बाद मतपत्र की वापसी से कई चुनौतियां बढ़ेंगी:
मतदान की गति: मुहर लगाने और पर्ची मोड़ने की प्रक्रिया के कारण मतदान की गति धीमी हो सकती है।
देर से आएंगे नतीजे: मतगणना मशीनों के बजाय हाथों से की जाएगी, जिससे परिणाम आने में देर रात तक का समय लग सकता है।
विवाद की आशंका: यदि किसी प्रत्याशी ने गिनती पर आपत्ति जताई, तो पुनर्गणना (Re-counting) में काफी समय लगेगा, जिससे विवाद की स्थिति बन सकती है।
कार्यभार: चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों का कार्यभार बढ़ जाएगा क्योंकि हर एक वोट को मैन्युअली गिनना और छांटना होगा।
उल्लेखनीय है कि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव पूर्व की भांति ईवीएम से ही संपन्न होंगे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक संपन्न कराई जानी है।
