मिडिल ईस्ट संकट: भीलवाड़ा टेक्सटाइल हब पर 'ब्रेक', करोड़ों का माल अटका, मालिक और श्रमिक परिवारों की धड़कनें बढ़ीं

Update: 2026-03-14 05:00 GMT


भीलवाड़ा। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक व्यापार के साथ-साथ  'टेक्सटाइल हब' भीलवाड़ा की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे तनाव के कारण भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग पर भारी दबाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अकेले भीलवाड़ा से होने वाला करीब  ₹1,000 करोड़ का कपड़ा और धागा निर्यात वर्तमान में संकट में है।

भीलवाड़ा टेक्सटाइल पर चौतरफा मार

कारोबार के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट के कारण कपड़ा उद्यमियों को कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

* अटके हुए शिपमेंट: करोड़ों रुपये का माल या तो कारखानों में पड़ा है या मुंद्रा और कांडला जैसे बंदरगाहों पर अटका हुआ है। विदेशी खरीदारों ने अनिश्चितता के चलते कई ऑर्डर 'होल्ड' पर डाल दिए हैं।

* फ्रेट (भाड़ा) में भारी उछाल: समुद्री रास्तों में बदलाव और जोखिम बढ़ने से शिपिंग खर्च 2 से 3 गुना तक बढ़ गया है। इससे पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स अब घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं।

* कच्चे माल की बढ़ती कीमतें: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर पॉलिएस्टर और सिंथेटिक धागों पर पड़ा है। पीवी यार्न (PV Yarn) की कीमतों में ₹10 से ₹15 प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वैश्विक सप्लाई चेन बाधित

खाड़ी देश और यूरोपीय बाजार भीलवाड़ा के कपड़े के मुख्य खरीदार हैं। उड़ानों के रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने से एयर कार्गो के जरिए होने वाला निर्यात भी ठप है। ज़ारा (Zara) और एचएंडएम (H&M) जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के लिए भारत से जाने वाला माल हवाई अड्डों पर जमा हो रहा है।

विशेषज्ञों की चिंता

उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भीलवाड़ा की करीब 400 से अधिक छोटी-बड़ी मिलों में उत्पादन और रोजगार पर गंभीर असर पड़ सकता है। निर्यातकों ने सरकार से इस संकट के दौरान वित्तीय राहत और विशेष नीतिगत सहायता की मांग की है।



भीलवाड़ा के विश्व प्रसिद्ध टेक्सटाइल उद्योग के पहियों पर ब्रेक लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों द्वारा अस्थिर स्थितियों का हवाला देते हुए ऑर्डर्स को फिलहाल 'होल्ड' पर डालने और शिपमेंट टालने से स्थानीय उद्यमियों में हड़कंप मच गया है। खाड़ी देशों और यूरोप की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित होने से करोड़ों रुपये का माल बंदरगाहों पर अटक गया है।


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