जीते-जी रिश्तो का 'कत्ल':: भीलवाड़ा में पिता ने झोली फैलाकर मांगी थी घर वापसी, बेटी नहीं मानी तो छपवा दिया शोक संदेश

Update: 2026-03-22 13:46 GMT

भीलवाड़ा। रिश्तों की डोर जब स्वाभिमान और सामाजिक मान्यताओं की भेंट चढ़ती है, तो मंजर कितना हृदयविदारक हो सकता है, इसकी बानगी भीलवाड़ा में देखने को मिली है। यहाँ एक पिता ने अपनी जीवित बेटी का मृत्यु प्रमाण-पत्र तो नहीं, लेकिन शोक संदेश छपवाकर समाज को यह बता दिया है कि उनके लिए उनकी लाड़ली अब मर चुकी है।

​झोली फैलाई, मिन्नतें कीं... पर प्यार के आगे हार गया 'पिता'

​जानकारी के अनुसार, युवती जयपुर में रहकर पढ़ाई कर रही थी, जहाँ उसने अपनी पसंद से दूसरे समाज के युवक से प्रेम विवाह कर लिया। जब यह जोड़ा परिजनों को मनाने घर पहुँचा, तो बात नहीं बनी। मामला थाने तक पहुँचा। थाने के भीतर का दृश्य भावुक कर देने वाला था—एक पिता अपनी बेटी के सामने झोली फैलाकर उसे घर लौटने की भीख माँग रहा था, लेकिन अपने जीवनसाथी को चुन चुकी बेटी ने कदम पीछे खींचने से इनकार कर दिया।

​20 मार्च को 'स्वर्गवास', 31 को होगा ब्रह्मभोज

​बेटी के इस फैसले से आहत पिता ने उसे अपने जीवन से पूरी तरह बेदखल करने का एक कठोर और अनोखा रास्ता चुना। उन्होंने बाकायदा शोक संदेश छपवाया है, जिसमें ​20 मार्च 2026: बेटी का 'स्वर्गवास' (रिश्ता टूटने का दिन) अंकित किया गया है।​22 मार्च: तीये की बैठक रखी गई। ​31 मार्च: मृत्यु के बाद होने वाला पारंपरिक 'ब्रह्मभोज' आयोजित किया जाएगा।

इनका कहना है

​"बेटी बालिग है और कानून उसे अपनी मर्जी से रहने का अधिकार देता है। परिजनों द्वारा शोक संदेश छपवाना उनका निजी और भावनात्मक निर्णय है।"

— संबंधित थानाधिकारी

​सामाजिक विडंबना या भावनात्मक विद्रोह?

​यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि आधुनिकता और रूढ़िवादिता के बीच चल रहे उस द्वंद्व को दर्शाती है जहाँ एक तरफ 'कानूनी अधिकार' है और दूसरी तरफ 'पारिवारिक भावनाएं'। पिता के लिए जिस बेटी ने समाज की मर्यादा लांघी, उसे उन्होंने शास्त्रों के अनुसार 'मृत' मानकर अपनी तरफ से अंतिम विदाई दे दी है।

​एक पिता का झोली फैलाना और फिर शोक संदेश छपवाना, समाज के लिए एक गहरा और चुभता हुआ सवाल छोड़ गया है।

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