भीलवाड़ा पुलिस को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: जांच में न्यायिक अधिकारी पर टिप्पणी अवमानना नहीं

Update: 2026-03-23 17:05 GMT


जयपुर/भीलवाड़ा हलचल | राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में भीलवाड़ा के पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक जांच के दौरान किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध दिए गए बयान या दर्ज टिप्पणियां स्वतः 'अदालत की अवमानना' (Contempt of Court) के दायरे में नहीं आएंगी।

आधिकारिक जांच के दौरान बयान अवमानना नहीं

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण व्यवस्था दी। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी किसी न्यायालय के निर्देशों के तहत चल रही आधिकारिक जांच में अपने बयान दर्ज करते हैं और वे बयान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, तो उन्हें 'अपराधिक अवमानना' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

केस डायरी की टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के दौरान केस डायरी में दर्ज टिप्पणियां, भले ही उनमें किसी न्यायिक अधिकारी के प्रति आलोचना या आरोप हों, तब तक अवमानना नहीं मानी जाएंगी जब तक कि उनका मूल उद्देश्य न्यायपालिका की छवि धूमिल करना या उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रसारित करना न हो।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही खारिज

उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने अब पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में जोर देते हुए कहा कि जांच के दौरान स्वतंत्र रूप से तथ्यों को दर्ज करना पुलिस का दायित्व है और इस प्रक्रिया को दबाने के लिए अवमानना कानून का इस्तेमाल हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता।

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