प्रेम और समर्पण की मिसाल:: अस्वस्थ पति की मौत के कुछ ही देर बाद पत्नी ने भी त्यागे प्राण, एक साथ उठीं दो अर्थियां

Update: 2026-03-24 09:09 GMT

  चित्तौड़गढ़  | चित्तौड़गढ़ जिले के कांकरवा क्षेत्र के बावरियों का खेड़ा गांव में प्रेम, समर्पण और सात जन्मों का साथ निभाने की एक ऐसी मार्मिक मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 85-90 वर्षीय बुजुर्ग दंपती हरिराम जाट और उनकी पत्नी रानी बाई जाट ने जीवनभर साथ निभाने के अपने वादे को मरते दम तक निभाया।

इलाज के दौरान पति का निधन

जानकारी के अनुसार, हरिराम जाट लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज उदयपुर के एक अस्पताल में जारी था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव बावरियों का खेड़ा लाया गया, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण हरिराम जाट के मिलनसार व्यक्तित्व को याद कर भावुक हो उठे।

बिछोह सहन नहीं कर सकी पत्नी

इसी बीच एक हृदयविदारक घटना ने सभी को झकझोर दिया। पति का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही उनकी बीमार पत्नी रानी बाई जाट पति के बिछड़ने का दुख सहन नहीं कर सकीं और कुछ ही समय बाद उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके अटूट प्रेम और आत्मिक जुड़ाव का ही परिणाम था कि दोनों ने एक साथ इस दुनिया को अलविदा कहा।

बैंड-बाजे के साथ निकली अंतिम यात्रा

गांव में इस घटना के बाद माहौल बेहद गमगीन हो गया, लेकिन साथ ही इस दंपती के अटूट प्रेम के प्रति ग्रामीणों में गहरा सम्मान भी देखा गया। परिजनों और ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि इस जोड़े को अंतिम विदाई भी एक साथ ही दी जाएगी। पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ बैंड-बाजे के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें विदा किया।

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