भीलवाड़ा: बसों के 'नंबर गेम' का काला कारोबार! एक नंबर पर दो बसें, फर्जी चेसिस और बेनकाब होते सफेदपोश?

Update: 2025-10-07 06:10 GMT


भीलवाड़ाहलचल । वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में सड़क परिवहन के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है। यहां बसों के संचालन में फर्जीवाड़े का ऐसा जाल बिछा है कि आम जनता की सुरक्षा दांव पर लगी है, वहीं सफेदपोश और बड़ा गिरोह इसके पीछे फल-फूल रहा है। सूत्रों के अनुसार, भीलवाड़ा की सड़कों पर धड़ल्ले से एक ही नंबर प्लेट पर दो-दो बसें दौड़ रही हैं। कई बसों के चेसिस नंबर फर्जी हैं, तो कुछ बसों पर एक ही चेसिस नंबर को दोहराया गया है।

अगर इन मामलों की सही ढंग से जांच हो जाए, तो कई रसूखदार और सफेदपोश लोगों के चेहरे से नकाब हट सकता है और पुलिस के हाथ एक बड़े संगठित गिरोह तक पहुंच सकते हैं।

MP में पकड़ा गया था भीलवाड़ा का 'नंबर बदलने वाला' गिरोह

इस बड़े फर्जीवाड़े के तार सीधे मध्य प्रदेश (MP) से जुड़ते हैं, जहां कुछ ही दिन पहले भीलवाड़ा के एक गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस गिरोह का काम पुरानी गाड़ियों के चेसिस नंबर बदलने का था। गिरफ्तारी के बाद, इस गिरोह ने कबूल किया था कि वे भीलवाड़ा में भी इसी तरह का काला कारोबार करते रहे हैं। यह स्वीकारोक्ति भीलवाड़ा में चल रहे 'नंबर गेम' पर गंभीर सवाल खड़े करती है और स्थानीय पुलिस व परिवहन विभाग की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

डीटीओ की कार्रवाई: स्कूल बस पर दो राज्यों की नंबर प्लेट!

परिवहन विभाग की ढिलाई के बावजूद, सोमवार को डीटीओ आरके चौधरी के निर्देश पर एक चौंकाने वाली कार्रवाई की गई। परिवहन निरीक्षक मनीष कुमार ने पांसल चौराहा से 100 फीट रोड की ओर जांच के दौरान एक निजी स्कूल बस को जब्त किया।

आगे की नंबर प्लेट: RJ 14 PG 8164 (राजस्थान)

पीछे की नंबर प्लेट: HR 69 A 7231 (हरियाणा)

बस के चालक से जब वैध कागजात मांगे गए, तो वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। इस बस में 9 स्कूली बच्चे सवार थे, जिन्हें दूसरी बस से सुरक्षित स्कूल भेजा गया। डीटीओ चौधरी ने बस को जब्त कर दो राज्यों की नंबर प्लेट, वैध दस्तावेज न दिखाने और नियमों के उल्लंघन के लिए चालान बनाया है।

सवाल यह है कि यह स्कूल बस इतने समय तक अलग-अलग राज्यों की दो नंबर प्लेटों के साथ कैसे चलती रही? क्या परिवहन विभाग की जांच केवल सोमवार को ही खुली?

जिम्मेदार कौन? सिस्टम की मिलीभगत पर सवाल

भीलवाड़ा की सड़कों पर चल रहे इस फर्जीवाड़ा राज को कौन संरक्षण दे रहा है?

एक नंबर पर दो-दो बसें चलने की खबर क्या स्थानीय आरटीओ (RTO) और परिवहन अधिकारियों की जानकारी में नहीं है?

MP में पकड़े गए चेसिस नंबर बदलने वाले भीलवाड़ा के गिरोह के लोकल नेटवर्क पर पुलिस क्यों चुप्पी साधे है?

स्कूल बसों तक में जब ऐसा बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है, तो क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ चालान काट कर अपनी ड्यूटी पूरी मान लेंगे?

इस पूरे मामले में गहन जांच की जरूरत है, ताकि परिवहन विभाग के अंदर की मिलीभगत का पर्दाफाश हो सके और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सफेदपोश माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके।

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