मंत्री गहलोत का बड़ा बयान: साल के अंत में हो सकते हैं पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनाव: मंत्री गहलोत का बड़ा बयान
जयपुर।
राजस्थान में पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनाव इस साल के अंत तक कराए जा सकते हैं। राज्य के पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री रमेशचंद्र मीणा गहलोत ने संकेत देते हुए कहा कि पंचायतों के पुनर्गठन पर बनी कैबिनेट सब-कमेटी 20 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद चुनाव की दिशा तय होगी।
मंत्री गहलोत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ग्रामीण और नगरीय दोनों स्तरों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को सक्रिय करना चाहती है और इसके लिए समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा, "पंचायत पुनर्गठन का मसौदा तैयार करने और आवश्यक बदलाव सुझाने के लिए एक कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया गया है, जो 20 दिनों में अपनी सिफारिशें पेश करेगी।"
गहलोत ने यह बयान उस समय दिया जब राज्यभर में पंचायतीराज संस्थाओं और नगर निकायों में चुनाव की अनिश्चितता को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। पिछली बार चुनी गईं कई पंचायतों और नगर पालिकाओं का कार्यकाल खत्म हो चुका है या समाप्ति के करीब है, जिससे प्रशासनिक निर्णयों पर अस्थिरता देखी जा रही है।
मंत्री के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि सरकार वर्ष 2025 के अंत तक राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा और आयोग की सहमति से चुनाव की तारीखें तय की जाएंगी।
सूत्रों के अनुसार, पुनर्गठन की प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण, जनसंख्या के आधार पर वार्डों की संख्या में बदलाव और कुछ पंचायतों को विभाजित या जोड़ा जाना शामिल है। यह पूरी प्रक्रिया आगामी जनगणना और स्थानीय विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों से पहले राज्य सरकार अपनी योजनाओं और विकास कार्यों का प्रचार करना चाहती है, ताकि ग्रामीण और शहरी मतदाताओं में विश्वास कायम किया जा सके। इन चुनावों को 2028 के विधानसभा चुनावों की भूमिका निर्माण के रूप में भी देखा जा रहा है।
वहीं, विपक्ष ने पंचायत पुनर्गठन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार पुनर्गठन की आड़ में कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष निगरानी की मांग की है।
पंचायत पुनर्गठन पर बनी कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में अब तक जिलों से मिले प्रस्तावों पर चर्चा की है। शिक्षा और पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंचायत, पंचायत समितियों औ जिला परिषदों की बाउंड्री लाइन में बदलाव की रिपोर्ट पर चर्चा की है।
नई पंचायतों और पंचायत समितियां बनाने के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, उन प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर मिली आपत्तियों और सुझावों पर भी चर्चा की गई है। प्रदेश में करीब 800 से 1000 नई ग्राम पंचायतें बन सकती हैं। 20 से ज्यादा नई पंचायत समितियां बन सकती हैं।
