बिना 'बस बॉडी कोड' वाली स्लीपर बसों पर गाज, इमरजेंसी गेट और पैनिक बटन नहीं मिला तो होगी जब्ती
@ सख्ती: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश @ परिवहन विभाग का एक्शन;
@अवैध डिक्की वाली बसें भी सड़कों से होंगी बाहर
भीलवाड़ा( हलचल)।
राजस्थान में स्लीपर बसों के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए परिवहन विभाग आज रात से बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। अब प्रदेश की सड़कों पर वही स्लीपर बसें चल पाएंगी जो 'बस बॉडी कोड' के मानकों को पूरा करती हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली, बिना इमरजेंसी गेट और अवैध डिक्की वाली बसों को विभाग द्वारा तुरंत जब्त किया जाएगा।
हादसों से सबक: सुरक्षा से समझौता नहीं
पिछले साल जैसलमेर में हुए दर्दनाक बस हादसे के बाद स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने कड़े आदेश जारी किए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा अवैध स्लीपर बसों पर सख्त कार्रवाई के निर्देशों के बाद अब राजस्थान परिवहन विभाग पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में है।
इन कमियों पर होगी सीधी जब्ती:
परिवहन विभाग की टीमें आज रात से नाकाबंदी कर बसों की जांच करेंगी। यदि बसों में निम्नलिखित सुविधाएं या मानक नहीं मिले, तो कार्रवाई तय है:
* इमरजेंसी गेट: आपात स्थिति में बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता।
* सेफ्टी हैमर: खिड़कियों के कांच तोड़ने के लिए जरूरी हथौड़ा।
* पैनिक बटन: यात्रियों की सुरक्षा के लिए अलर्ट सिस्टम।
* गैंगवे (गलियारा): चलने-फिरने के लिए निर्धारित चौड़ा रास्ता।
* अवैध डिक्की: बस के नीचे सामान रखने के लिए बनाई गई अवैध जगह।
बिना 'बॉडी कोड' वाली बसों पर पाबंदी
आदेशानुसार, जिन बसों का निर्माण 'बस बॉडी कोड' के तहत नहीं हुआ है, उन्हें अब सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अक्सर देखा गया है कि निजी बस ऑपरेटर मुनाफे के चक्कर में बस की बॉडी में अवैध बदलाव कर लेते हैं, जो दुर्घटना के समय जानलेवा साबित होता है।
> परिवहन विभाग की चेतावनी:
> आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ करने वाले बस मालिकों को बख्शा नहीं जाएगा। शुक्रवार रात से ही प्रदेश भर के फ्लाइंग दस्ते हाईवे और बस स्टैंडों पर मुस्तैद रहेंगे।
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अब केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
केंद्रीय Road और Transport मिनिस्टर नितिन गडकरी ने नए नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि अब केवल केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता ही स्लीपर बस बना सकेंगे. अब स्थानीय और हाथ से बस बॉडी बनाने वाले कारीगरों को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं होगी. सरकार का मानना है कि इससे बसों की quality बेहतर होगी और सुरक्षा स्तर में बड़ा सुधार आएगा.
उन्होंने कहा
कि अक्सर ट्रैवल एजेंसियां अपनी सुविधा के अनुसार स्थानीय बॉडी बिल्डरों से बस बनवाती थीं, जिसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो जाती थी. सरकार ने सिर्फ नई बसों के लिए ही नहीं, बल्कि देश में चल रही सभी स्लीपर बसों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब सभी मौजूदा स्लीपर बसों में जरूरी सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य होगा.
स्लीपर बसों में कौन-कौन से फीचर जरूरी होंगे
फायर डिटेक्शन सिस्टम
इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम
ड्राइवर थकान अलर्ट सिस्टम यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम
इमरजेंसी एग्जिट
सेफ्टी हैमर
AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन अनिवार्य
नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना होगा. यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है. जो भी स्लीपर बस इस कोड का पालन नहीं करेगी, उसे सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. AIS-052 यानी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड-052, भारत का आधिकारिक बस बॉडी सुरक्षा और डिजाइन मानक है. इसमें बस की बनावट, ढांचा और सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियम तय किए गए हैं.
भीलवाड़ा हलचल की अपील: यात्री सफर शुरू करने से पहले बस की सुरक्षा व्यवस्था जरूर जांच लें। सुरक्षित सफर आपका अधिकार है।
