वेतन विसंगति दूर करने व पदनाम बदलने तथा प्रबोधकों समकक्ष पदोन्नति की मांग

Update: 2026-03-07 17:17 GMT

 

भगवानपुरा  (कैलाश शर्मा ) राजस्थान के 25 हजार प्रबोधकों की प्रमुख मांगों को लेकर संगठन ने शुक्रवार को जयपुर शिक्षा संकुल के सभागार में आयोजित शिक्षक संघों से वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और शासन सचिव कृष्ण कुणाल व शिक्षा निदेशक सीताराम जाट को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं। प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन सिंह शेखावत के हस्ताक्षर वाले इन ज्ञापनों में प्रबोधक कैडर की लंबित समस्याओं का तत्काल समाधान और नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों पर व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।

प्रबोधक संघ राजस्थान के प्रदेश महामंत्री संजय कौशिक ने बताया कि प्रबोधक सेवा संबंधी ज्ञापन में संघ ने मांग की है कि 2008 से पहले राजकीय उपक्रमों और विद्यालयों में की गई अनुबंध आधारित सेवाओं को प्रबोधक सेवा में जोड़ दिया जाए ताकि सभी प्रबोधकों को पूर्ण पेंशन मिल सके। 1 जुलाई 2013 को मूल वेतन 11,170 रुपये के बजाय 12,920 रुपये किया जाए और 25 हजार प्रबोधकों को इसका नगद लाभ दिया जाए। वरिष्ठ प्रबोधकों (बी.एड./बी.पी.एड.) को द्वितीय श्रेणी अध्यापक के समकक्ष कार्यभार सौंपा जाए। उन्हें मिडिल स्कूल हैडमास्टर या सेकंडरी सेटअप में विषयाध्यापक बनाया जाए। पदनाम बदलकर वरिष्ठ प्रबोधक (बी.एड./बी.पी.एड.) को “वरिष्ठ अध्यापक” और प्रबोधक (एस.टी.सी.) को “अध्यापक” किया जाए। शेष बचे 5,392 प्रबोधकों की तत्काल पदोन्नति हो। अन्य संवर्गों की तरह प्रबोधकों की भी नियमित डीपीसी हो और पदोन्नति के 5 अवसर दिए जाएं अथवा व्याख्याता पद पर 20 प्रतिशत कोटा तय किया जाए। केन्द्र सरकार की तरह पूर्ण पेंशन के लिए 25 वर्ष की सेवा को घटाकर 20 वर्ष किया जाए। एसीपी का लाभ 9-18-27 वर्ष की बजाय 8-16-24 वर्ष पर दिया जाए। समसा, विवेकानंद मॉडल स्कूल, कस्तूरबा होस्टल, मेवात बालिका आवासीय विद्यालय, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों और जनजाति छात्रावासों में अन्य अध्यापकों के समान प्रबोधकों को भी प्रतिनियुक्ति का मौका दिया जाए।

शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने पर संघ के सुझाव ।वही संघ ने शासन सचिव को दिए ज्ञापन में लिखा है कि इस बार 1 अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू करने जा रहे हैं, इसलिए पुराने अनुभवों (2006) का भी अध्ययन करें। संघ ने कहा है कि 1 अप्रैल से ग्रीष्मावकाश तक सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य रखी जाए।

उसी दिन पुरानी पुस्तकें जमा हों, नई पुस्तकें वितरित हों, परीक्षा परिणाम घोषित हों, मार्कशीट बांटी जाए और मेघा पीटीएम भी हो। प्रवेशोत्सव के तहत अभिभावक संपर्क और प्रचार-प्रसार किया जाए। हर विद्यालय का 15 दिन में दो बार निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। 21 जून की बजाय 1 जुलाई से ही विद्यालय खोले जाएं (क्योंकि बच्चे पहले नहीं आते है)। प्रवेश की आयु निजी स्कूलों जैसी व्यवहारिक बनाई जाए। पीएम श्री विद्यालयों में शिक्षको की कमी पूरी हो। द्वितीय श्रेणी से लेक्चरर पदोन्नति काउंसलिंग में नगर पालिका क्षेत्र के खाली पद भी दिखाए जाएं। एमडीएम और दूध की जिम्मेदारी शिक्षकों से हटाकर किसी अन्य एजेंसी को सौंपी जाए। दूध के स्थान पर अंकुरित अनाज, मिलेट्स, फल आदि दिए जाएं।गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत के एल-2, द्वितीय श्रेणी और व्याख्याता शिक्षकों को किसी भी डेपुटेशन पर न भेजा जाए। पीईईओ, सीबीईओ, डीईईओ द्वारा दस्तावेजों की पावती अनिवार्य और आवक रजिस्टर में एंट्री अनिवार्य की जाए। विद्यालय भवनों की सुरक्षा के लिए प्रतिवर्ष समसा व पीडब्ल्यूडी के जेईएन/एईएन द्वारा निरीक्षण कर नोटिस बोर्ड पर प्रमाण-पत्र चस्पा किया जाए।


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