हमीरगढ़: बनास नदी को बचाने और रिवर फ्रंट विकसित करने की उठी मांग, बूंदी की घोड़ा पछाड़ नदी की तर्ज पर विकास की उम्मीद
हमीरगढ़ (सत्यनारायण व्यास)। हमीरगढ़ नगर पालिका और रीको क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली बनास नदी के अस्तित्व को बचाने और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के प्रबुद्धजनों और स्थानीय जनता का मानना है कि यदि बूंदी की घोड़ा पछाड़ नदी की तर्ज पर यहाँ भी रिवर फ्रंट और निर्माणाधीन मंदिर के साथ विकास कार्य किए जाएं, तो यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम होगा।
विधायकों से पहल की उम्मीद
यह क्षेत्र मांडल और सहाड़ा विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ा होने के कारण दोनों ही विधायकों के लिए विकास का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बनास के दूसरे तट पर नगर पालिका द्वारा उद्यान विकसित करने की योजना है। चर्चा है कि बजट लैप्स होने की संभावना है, जिसे इसी रिवर फ्रंट योजना में लगाकर जलस्तर सुधार, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
बजरी माफिया और प्रदूषण से संकट में बनास
कभी सदानीरा रहने वाली और तरबूज, खरबूजे व खीरे की खेती के लिए प्रसिद्ध बनास नदी आज बजरी माफियाओं और बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण के कारण दम तोड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो औद्योगिक विकास की भेंट चढ़कर मां बनास 'शहीद' हो सकती है। प्रदूषित होता जल और जमीन आने वाली पीढ़ी के लिए एक भयावह भविष्य का संकेत दे रहे हैं।
आने वाली पीढ़ी के लिए अनूठा तोहफा
'बनास बचाओ' के इस पुनीत यज्ञ में जनप्रतिनिधियों की पहल, प्रशासन का सकारात्मक रुझान और आम जनता की भागीदारी ही इस प्राकृतिक संपदा को बचा सकती है। हमीरगढ़ से भीलवाड़ा के बीच स्थित इस उजड़ती नदी का पुनरुद्धार जनजीवन और प्रकृति की रक्षा के लिए एक अविस्मरणीय कार्य साबित होगा।
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