देशभर में 1 अप्रैल से बदलेगा ईंधन का गणित: 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल होगा अनिवार्य

Update: 2026-03-29 08:30 GMT


भीलवाड़ा हलचल। आगामी 1 अप्रैल 2026 से देश के वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की जेब और वाहनों के ईंधन से जुड़ा एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने अब पूरे देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के तहत अब पेट्रोल पंपों पर न्यूनतम 95 ऑक्टेन स्तर और 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) वाला ईंधन ही सप्लाई किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है।

क्या है ई-20 ईंधन और क्यों पड़ी जरूरत?

इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने की लुगदी, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। जब 80 प्रतिशत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है, तो इसे 'E-20' ईंधन कहते हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) के आयात पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी कृषि आधारित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत: ₹8 तक कम हो सकते हैं दाम

इस नए ईंधन की सबसे बड़ी खूबी इसकी कीमत है। जानकारों के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सामान्य पेट्रोल के मुकाबले प्रति लीटर लगभग 8 रुपये तक सस्ता पड़ सकता है। यदि कोई उपभोक्ता महीने में 40 लीटर पेट्रोल खर्च करता है, तो उसे सीधे तौर पर 300 रुपये से अधिक की मासिक बचत होगी। यह महंगाई के दौर में मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को दोहरा लाभ

* प्रदूषण में कमी: इथेनॉल के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन कम होता है, जिससे वायु प्रदूषण पर लगाम लगेगी।

* मजबूत अर्थव्यवस्था: कच्चे तेल के आयात के लिए खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

* किसानों को लाभ: इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

पुरानी गाड़ियों के मालिक रहें सावधान

जहाँ नई गाड़ियां (BS-VI फेज 2) इस ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार हैं, वहीं पुरानी गाड़ियों के मालिकों को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिक इथेनॉल मिश्रण से पुरानी गाड़ियों की रबर पाइप और इंजन के कुछ हिस्सों पर असर पड़ सकता है। साथ ही, माइलेज में भी मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है।

भविष्य की राह

सरकार का लक्ष्य केवल 20 प्रतिशत तक सीमित रहना नहीं है। आने वाले वर्षों में इस मिश्रण की मात्रा को और बढ़ाने की योजना है, ताकि देश ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके। 1 अप्रैल से होने वाला यह बदलाव न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

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