​"बजट 2026: भीलवाड़ा में सियासी घमासान; भाजपा बोली- 'ऐतिहासिक', कांग्रेस ने बताया 'जुमलों का पिटारा'!"

Update: 2026-02-01 13:07 GMT

 भीलवाड़ा हलचल ।बजट 2026 पर भीलवाड़ा के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच से छनकर आ रही प्रतिक्रियाएं यहाँ दी गई हैं। सत्ता पक्ष जहाँ इसे 'ऐतिहासिक' मान रहा है, वहीं विपक्ष इसे 'निराशाजनक' बता रहा है।

भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने बजट को अच्छा करार देते हुए विकासोन्मुखी बताया है। पाचप्पा जिला अध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा कांग्रेस शहर अध्यक्ष जीपी खटीक ओर मनोज पालीवाल ने बजट को निराशाजनक बताया आप भी सुनिए किसने क्या कहा ।

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​कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया (विपक्ष)

​दुर्गेश शर्मा (पूर्व जिलाध्यक्ष, कांग्रेस): "यह बजट केवल शब्दों का मायाजाल है। भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग को बड़ी उम्मीदें थीं कि बिजली दरों या GST में राहत मिलेगी, लेकिन बजट में मध्यम उद्योगों (MSME) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। यह आम आदमी की जेब खाली करने वाला बजट है।"

​शिव कुमार कौशिक: "बजट में रोजगार के ठोस अवसर गायब हैं। भीलवाड़ा का युवा डिग्री लेकर सड़कों पर है, लेकिन उसके लिए कोई विशेष स्किल हब या स्थानीय इंडस्ट्री पैकेज नहीं दिया गया। किसानों को भी एमएसपी की गारंटी के बिना केवल आंकड़ों में उलझाया गया है।"

​मधु जाजू: "गृहिणियों के लिए रसोई का बजट संभालना अब और मुश्किल होगा। बढ़ती महंगाई के बीच सरकार का यह दावा कि बजट जनहितैषी है, पूरी तरह खोखला है। महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के नाम पर केवल पुरानी योजनाओं को नया नाम दिया गया है।"

​महेश सोनी: "केंद्र सरकार ने एक बार फिर भीलवाड़ा की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं और टेक्सटाइल पार्क की पुरानी मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह बजट विकास विरोधी और केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने वाला है।"

​भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया (सत्ता पक्ष)

​राकेश पाठक (नगर परिषद सभापति/भाजपा नेता): "प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पेश यह बजट 'विकसित भारत' की नींव है। इनकम टैक्स में ₹13 लाख तक की राहत भीलवाड़ा के हजारों नौकरीपेशा लोगों के लिए बहुत बड़ी सौगात है। यह बचत को बढ़ावा देने वाला बजट है।"

​महावीर समदानी: "वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इंडिया पर जोर दिया है। भीलवाड़ा जैसे औद्योगिक शहरों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। नई वंदे भारत ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ने से हमारा कपड़ा व्यापार देश के कोने-कोने तक तेजी से पहुँचेगा।"

​विट्ठल शंकर अवस्थी (पूर्व विधायक): "यह बजट देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी बढ़ाना और कैंसर की दवाओं को सस्ता करना यह दर्शाता है कि सरकार को गरीबों और मध्यम वर्ग की चिंता है। भीलवाड़ा के विकास को नई गति मिलेगी।"

​आम आदमी की प्रतिक्रिया

​विजेंद्र गौड़: "बजट में इनकम टैक्स की नई छूट स्वागत योग्य है, लेकिन बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतें जब तक कम नहीं होंगी, तब तक इस बचत का कोई खास मतलब नहीं रह जाएगा। पेट्रोल-डीजल पर भी राहत मिलनी चाहिए थी।"

​अनीता: "एक महिला के तौर पर मुझे खुशी है कि कैंसर की दवाएं सस्ती हुई हैं और आयुष्मान भारत में बुजुर्गों की उम्र सीमा घटाई गई है। इससे हमारे परिवारों पर मेडिकल खर्च का बोझ कम होगा, जो एक बड़ी राहत है।"

​गौरीशंकर: "किसान के लिए पीएम-किसान निधि बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन खेती की लागत (बीज, खाद) भी कम होनी चाहिए। कुल मिलाकर बजट संतुलित है, लेकिन लागू होने के बाद ही असली असर पता चलेगा।"


कैलाश सोनी (अध्यक्ष, राजस्थान जनमंच)

​"विकसित भारत 2047 की ओर मजबूत कदम"

​अर्थव्यवस्था: मोदी सरकार का यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

​राहत: गंभीर बीमारियों की दवाइयां सस्ती करना और सोलर व ईवी बैटरी पर छूट देना आम जनता के हित में है।

​उद्योग: देश भर में मेगा टेक्सटाइल पार्क की घोषणा से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

​विकास: शहरों में मेडिकल हब और विकास के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का प्रावधान सराहनीय है।

​सीएस रागिनी गुप्ता (रागिनी गुप्ता एंड एसोसिएट्स)

​"ऐतिहासिक और संतुलित बजट"

​बजट आकार: वित्त मंत्री ने ₹53.5 लाख करोड़ का विशाल बजट पेश किया है।

​प्रमुख घोषणाएं: MSME के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 3 नए AIIMS का प्रावधान ऐतिहासिक है।

​राजकोषीय घाटा: फिस्कल डेफिसिट को 4.3% पर रखना एक संतुलित कदम है।

​टैक्स: कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटने से इलाज सस्ता होगा, हालांकि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

स्टेट फेडरेशन ऑफ यूनेस्को एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक गोपाल लाल माली ने केन्द्रीय बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे मध्यम वर्ग को किसी तरह की राहत नहीं मिली।

माली ने कहा कि महंगाई नियंत्रण को लेकर भी बजट में कोई ठोस और कारगर प्रावधान नहीं किए गए हैं। 

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