विद्युत दरों में भारी बढ़ोत्तरी का विरोध
भीलवाडा हलचल । मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, उद्योग मंत्री को प्रतिवेदन भेजकर विद्युत दरों में भारी बढ़ोत्तरी का विरोध कर वापस लेने की मांग की। आम तौर से विद्युत दरें घरेलू उपभोक्ताओं पर 50 पैसे प्रति युनिट से लेकर औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 1 रुपये से अधिक बढ़ गई है।
चैम्बर के मानद महासचिव आर के जैन ने बताया कि इसका मुख्य कारण 1 रुपया प्रति यूनिट का रेगुलेटरी सरचार्ज लागू होना है, इसके अतिरिक्त ऊर्जा शुल्क में 20 पैसे प्रति यूनिट एवं फिक्स चार्जेज बढ़ोत्तरी से 8 पैसा प्रति यूनिट की वृद्धि के साथ जोड़ने पर 132 केवी स्तर के औद्योगिक उपभोक्ताओं पर लगभग 1.25 रुपये प्रति यूनिट का बोझ पड़ रहा है। अब, राजस्थान में प्रति यूनिट मूल बिजली लागत 7.96 रुपये प्रति यूनिट है, जो मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है, जहाँ बिजली लागत 7.14 रुपये प्रति यूनिट है।
विद्युत दरों में वृद्धि के साथ उद्योग टैरिफ युद्ध के कारण वैश्विक और घरेलू बाजार की चुनौतियों के कारण तीव्र आर्थिक मंदी का सामना कर रहे है। साथ ही अन्य इनपुट लागत राजस्थान के उद्योगों को अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा है। इसका असर अप्रत्यक्ष रुप से आम रोजगार पर भी पड़ रहा है।
रेगुलेटरी सरचार्ज, फ्अल सरचार्ज के स्थान पर लगाया गया है, जो पहले त्रैमासिक आधार पर 10 से 30 पैसे प्रति यूनिट की दर से अधिभार लगाया जाता था। उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय, 1.00 रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि उद्योगों की कमर तोड़ देगी।
चैम्बर ने नए टैरिफ आदेश में आरईआरसी द्वारा पारित 1 रुपया प्रति यूनिट के रेगुलेटरी सरचार्ज को वापस लेने की मांग की। इससे उद्योगों को ऐसे कठिन समय में राहत मिलेगी एवं रोज़गार की सुरक्षा होगी साथ ही राजस्थान एक इन्वेस्टमेन्ट डेस्टीनेशन बना रहेगा।
टीओडी टैरिफ दिन के ऑफ-पीक घंटों (दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक, 4 घंटे) के दौरान ऊर्जा शुल्क पर 10 प्रतिशत की छूट दी गई है। जो औद्योगिक इकाइयों के लिए किसी काम का नहीं है; दिन के समय कैप्टिव सोलर प्लांट पूरी ऊर्जा आपूर्ति करते हैं और डिस्कॉम ऊर्जा का उपयोग कम मात्रा में होता है। इसी प्रकार, पीक आवर्स (सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजे तक, 2 घंटे) में 5ः और शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक, 4 घंटे) में 10 प्रतिशत का अधिभार लगाया गया है, जो कि अनुचित है।
चैम्बर ने अन्य राज्यों की तरह उद्योगों को भी सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक 25 प्रतिशत की छूट देने की मांग की।
