मेवाड़ महाराणा के राजदरबार में गूंजा मांडल का गैर नृत्य, शाही अंदाज़ में हुआ स्वागत
उदयपुर/मांडल (सोनिया सागर)। मेवाड़ की आन-बान-शान के प्रतीक सिटी पैलेस, उदयपुर में होलिका दहन के पावन अवसर पर भीलवाड़ा जिले के मांडल कस्बे की ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर 'गैर नृत्य' ने शाही ठाठ के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जैसे ही होलिका दहन की ज्योति प्रज्वलित हुई, पूरा राजदरबार ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा की छटा से जीवंत हो उठा।
विदेशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध
राजस्थान लोक कला केन्द्र, मांडल के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष प्रस्तुति का नेतृत्व वरिष्ठ लोक कलाकार रमेश बुलिया ने किया। कलाकारों ने शौर्य और परंपरा से ओतप्रोत नृत्य की ऐसी मनोहारी प्रस्तुति दी कि वहां मौजूद देश-विदेश के सैलानी देखते रह गए। रंग-बिरंगी पगड़ियाँ, पारंपरिक अंगरखे और गोल घेरे में थिरकते नर्तकों के अद्भुत तालमेल ने राजस्थान की जीवंत विरासत को जीवंत कर दिया।
सांस्कृतिक अस्मिता का वैश्विक मंच
रमेश बुलिया ने बताया कि विगत कई वर्षों से मांडल का यह दल मेवाड़ महाराणा के दरबार में अपनी कला का प्रदर्शन करता आ रहा है। इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और लोक वेशभूषा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। राजदरबार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गैर नृत्य की ऊर्जा ने मिलकर होली के उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया, जो मांडल और सम्पूर्ण राजस्थान के लिए गौरव का विषय है।
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