भारत कॉटनेट 2026: भीलवाड़ा से ‘कस्तूरी कॉटन विलेज’ और ‘कस्तूरी कॉटन मित्र’ पहल का हुआ शंखनाद
भीलवाड़ा। भारत को वैश्विक कपास बाजार में अग्रणी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए TEXPROCIL ने CITI-CDRA के सहयोग से ‘कस्तूरी कॉटन विलेज’ और ‘कस्तूरी कॉटन मित्र’ पहल का औपचारिक शुभारंभ किया है। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में ‘भारत कॉटनेट 2026’ के दौरान किया गया।
इस पहल को केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय, भारतीय कपास निगम (CCI) और राजस्थान सरकार का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। कार्यक्रम में ILO, ICAR-CIRCOT सहित उद्योग जगत के दिग्गजों और स्पिनिंग मिल प्रतिनिधियों ने शिरकत की।
मॉडल गांवों से बदलेगी कपास की सूरत
अभियान के तहत देश के प्रमुख कपास बेल्ट के प्रत्येक जिले में 3 से 5 मॉडल गांव विकसित किए जाएंगे। इन ‘कस्तूरी कॉटन विलेज’ में:
प्रमाणित बीज: कस्तूरी कॉटन भारत मानक के अनुरूप बीजों का उपयोग होगा।
उन्नत तकनीक: वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और सही कटाई प्रक्रियाओं पर जोर दिया जाएगा।
समान गुणवत्ता: वैश्विक मानकों के अनुसार एक समान रेशा उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।
‘कस्तूरी कॉटन मित्र’ करेंगे किसानों का मार्गदर्शन
खेत स्तर पर तकनीकी सहायता के लिए विशेष ‘कस्तूरी कॉटन मित्र’ (फील्ड फैसिलिटेटर) नियुक्त किए जाएंगे। ये विशेषज्ञ किसानों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षित करेंगे:
मृदा स्वास्थ्य: बायोचार (Biochar) के माध्यम से मिट्टी का पुनर्जीवन।
संसाधन प्रबंधन: जल का कुशल प्रबंधन और उर्वरकों का संतुलित उपयोग।
पोस्ट-हार्वेस्ट: फसल कटाई के बाद की वैज्ञानिक प्रक्रियाएं ताकि रेशे की गुणवत्ता बनी रहे।
ELS कॉटन: आयात पर लगाम और प्रीमियम बाजार
इस पहल का विशेष फोकस Extra-Long Staple (ELS) कॉटन पर है, जिसकी लंबाई 34mm से 35mm+ होती है। इससे न केवल भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि घरेलू प्रीमियम स्पिनिंग मिलों को उच्च श्रेणी का कच्चा माल मिल सकेगा। डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सिस्टम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब भारतीय कपास के उद्गम और शुद्धता की पुष्टि कर सकेंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का प्रीमियम मूल्य मिलेगा।
