आकोला (रमेश चंद्र डाड)हुरड़ा से बीगोद वाया कोटड़ी-बड़ा महुआ मार्ग पर नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण कार्य के लिए 4680 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। कुल 39 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कार्य 16 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था और इसे 15 अक्टूबर 2024 तक पूरा किया जाना निर्धारित है, लेकिन इतनी बड़ी स्वीकृति और समयसीमा के बावजूद सड़क की स्थिति बेहद चिंताजनक है। बीगोद से बड़ा महुआ तक बने इस स्टेट हाईवे पर महज एक साल में ही डामर उखड़ना, सतह का फटना और जगह-जगह बड़े गड्डों का बन जाना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहगीरों का कहना है कि सड़क पर चलना जोखिम भरा हो गया है। दुपहिया वाहन चालकों को फिसलने का खतरा रहता है, जबकि चारपहिया वाहन भी गड्डों से बचते हुए रेंग-रेंगकर निकलते हैं। कई जगह
बीगोद से बड़ा महुआ सड़क पर हो रहे गड्डे।
सड़क पर उभरे गहरे गड्डे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण हल्की बारिश या दबाव भी सड़क नहीं झेल पाई। रोजाना खेतों, बाजार और काम पर जाने वाले ग्रामीण इन खतरनाक गड्डों से गुजरने को मजबूर हैं। सड़क की इस बदहाली को लेकर ग्रामीणों
में जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि विभाग ने जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया, तो वे सामूहिक रूप से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने अधिकारियों से तत्काल निरीक्षण करवाहुरड़ा से बीगोद वाया कोटड़ी-बड़ा महुआ मार्ग पर नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण कार्य के लिए 4680 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। कुल 39 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कार्य 16 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था और इसे 15 अक्टूबर 2024 तक पूरा किया जाना निर्धारित है, लेकिन इतनी बड़ी स्वीकृति और समयसीमा के बावजूद सड़क की स्थिति बेहद चिंताजनक है। बीगोद से बड़ा महुआ तक बने इस स्टेट हाईवे पर महज एक साल में ही डामर उखड़ना, सतह का फटना और जगह-जगह बड़े गड्डों का बन जाना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहगीरों का कहना है कि सड़क पर चलना जोखिम भरा हो गया है। दुपहिया वाहन चालकों को फिसलने का खतरा रहता है, जबकि चारपहिया वाहन भी गड्डों से बचते हुए रेंग-रेंगकर निकलते हैं। कई जगह
बीगोद से बड़ा महुआ सड़क पर हो रहे गड्डे।
सड़क पर उभरे गहरे गड्डे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण हल्की बारिश या दबाव भी सड़क नहीं झेल पाई। रोजाना खेतों, बाजार और काम पर जाने वाले ग्रामीण इन खतरनाक गड्डों से गुजरने को मजबूर हैं। सड़क की इस बदहाली को लेकर ग्रामीणों
में जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि विभाग ने जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया, तो वे सामूहिक रूप से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने अधिकारियों से तत्काल निरीक्षण करवाकर गारंटी अवधि में ही सड़क को ठीक करवाने की मांग की है, ताकि सुरक्षित यातायात बहाल होकर गारंटी अवधि में ही सड़क को ठीक करवाने की मांग की है, ताकि सुरक्षित यातायात बहाल हो।
