आकोला (रमेश चंद्र डाड) मुनिकुल ब्रह्मचर्याश्रम वेद संस्थान बरूंदनी में सप्तम (अंतिम)वर्ष के सभी छात्रों का (दीक्षांत )समावर्तन संस्कार वैदिक विधि विधान पूर्वक संपन्न हुआ प्रधानाचार्य कैलाश चंद्र जोशी ने समावर्तन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालकर बताया कि समावर्तन संस्कार हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से 12वां (कुछ मान्यताओं में 14वां) महत्वपूर्ण संस्कार है। इसका शाब्दिक अर्थ है "घर वापस लौटना"। प्राचीन काल में, गुरुकुल में शिक्षा पूरी होने के बाद ब्रह्मचारी का गुरु के आश्रम से अपने घर लौटते समय यह विदाई समारोह किया जाता था, जो आज के दीक्षांत समारोह जैसा है। मुरलीधर पंचोली ने कार्यक्रम की अनुशंसा की इस कार्यक्रम में कर्मकांड विद्वान रतनलाल चास्टा ने कार्य को विधिपूर्वक संपन्न करवाया साथ ही हरि शंकर उदय लाल उमाकांत हरीश कुमार की सभी अन्य वैदिक विद्वान उपस्थित हुए