किसानों के लिए "आपणों खेत-आपणी खाद" अभियान 6 अप्रैल से: भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश में जैविक खेती पर रहेगा जोर

Update: 2026-04-03 18:35 GMT


भीलवाड़ा/जयपुर। जलवायु परिवर्तन और रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच राज्य में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए "आपणों खेत-आपणी खाद" अभियान शुरू किया जा रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने इस राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान की घोषणा की है, जो 6 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित होगा। इस अभियान के तहत भीलवाड़ा जिले सहित पूरे प्रदेश के किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जाएगा।

मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि वर्तमान में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह अभियान किसानों को अपने खेत में उपलब्ध संसाधनों से ही जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करेगा। इससे न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि फसलों की गुणवत्ता भी सुधरेगी।

अभियान के तहत कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरक और प्राकृतिक खेती की विधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेष रूप से ढैंचा, ग्वार और चवला जैसी हरी खाद के उपयोग से खेतों की उर्वरता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों में भी कृषक गोष्ठियां, रात्रि चौपाल, प्रभात फेरियां और विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और आईसीएआर के वैज्ञानिक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की आधुनिक जानकारी देंगे।

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