कहीं मिला नया पांव, तो कहीं गूंज उठी जीवन की नई धमक

Update: 2026-02-12 11:26 GMT

भीलवाड़ा । अक्सर कहा जाता है कि इंसान वही है जो दूसरों का दर्द समझे, लेकिन जब कोई किसी के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने का जरिया बन जाए, तो वह कार्य वंदनीय हो जाता है। भीलवाड़ा की धरा पर कुछ ऐसा ही सेवा का संगम उमड़ा है, जहाँ भारत विकास परिषद की विवेकानंद शाखा के तत्वावधान में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित 56वें दिव्यांगजन शिविर ने सैंकड़ों घरों के आंगन में खुशियों का उजाला फैला दिया है। अजय इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रामेश्वर काबरा के सुपुत्र स्वर्गीय मनीष काबरा की पावन स्मृति में लगा यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए नया जीवन है जो चलने-फिरने या सुनने की शक्ति खो चुके थे।

जब छलक उठी खुशी की बूंदें

शिविर का दृश्य बड़ा ही भावुक करने वाला था। बरसों से बैसाखियों के सहारे घिसट रहे पैरों को जब भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के विशेषज्ञों ने 'जयपुर फुट' का सहारा दिया, तो उनकी आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। चेहरे की वो चमक बता रही थी कि अब वे किसी पर बोझ नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे। हिंडोली के सूर्य प्रकाश ने जब कृत्रिम पैर लगने के बाद मैदान में मोटरसाइकिल चलाकर दिखाई, तो वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यह दृश्य साबित कर रहा था कि हौसलों के आगे शारीरिक अक्षमता बहुत छोटी है।

संतों का सानिध्य और सेवा का संकल्प

उद्घाटन समारोह में हरी सेवा धाम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने कहा— "जो हर चेहरे पर मुस्कान ला सके, वह कोई साधारण कार्य नहीं है। संत-महात्मा तो सदैव ऐसे पुनीत कार्यों के लिए तत्पर रहते हैं।" वहीं, आरएसएस के विभाग प्रचारक चांदमल सोमानी ने भारतीय संस्कृति का सार समझाते हुए कहा कि सनातन में सेवा ही सर्वोपरि है। पशु भी अपने परिवार को पालते हैं, लेकिन मनुष्य वही है जो दूसरों की सेवा के लिए अपना तन-मन-धन समर्पित कर दे।

पंजीयन का आंकड़ा 555 पार, हाथों-हाथ मिल रही राहत

शिविर की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 555 से अधिक दिव्यांगजनों का पंजीयन हो चुका है। यहाँ कोई इंतजार नहीं, बल्कि एक कार्यशाला की तरह युद्ध स्तर पर हाथ-पैर बनाने का काम चल रहा है। जरूरतमंदों को श्रवण यंत्र, बैसाखी और व्हीलचेयर, कृत्रिम हाथ-पैर और कैलीपर, वॉकर और अन्य सहायक उपकरण दिए गए। पूरी टीम के साथ डॉ. के.एस. पारीक और रामलाल सहित 14 विशेषज्ञ दिन-रात जुटे हुए हैं ताकि कोई भी खाली हाथ न लौटे।

सिर्फ अंग ही नहीं, अधिकार भी मिल रहे

यह शिविर केवल कृत्रिम अंगों तक सीमित नहीं है। सामाजिक सरोकार निभाते हुए यहाँ दिव्यांगजन प्रमाण पत्र (52 लोगों के बनाए गए) और रोडवेज पास बनाने की सुविधा भी मौके पर ही दी जा रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक नूतन कुमार शर्मा की टीम इस प्रशासनिक कार्य में पूरा सहयोग कर रही है। साथ ही, दंत चिकित्सा शिविर में डॉ. वैभव पारीक ने 52 मरीजों का उपचार कर इस सेवा यज्ञ में अपनी आहुति दी।

14 फरवरी तक जारी रहेगा खुशियों का सिलसिला

अजय इंडिया लिमिटेड के भोजन सहयोग और रजनीकांत आचार्य के कुशल संचालन में चल रहे इस शिविर का समापन 14 फरवरी को होगा। शिविर संयोजक मनोज माहेश्वरी और भैरूलाल अजमेरा ने बताया कि लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करना है। शहर वासियों का कहना है कि यह शिविर हमें याद दिलाता है कि यदि हाथ थामने का संकल्प दृढ़ हो, तो कोई भी व्यक्ति खुद को असहाय महसूस नहीं करेगा। सेवा का यह संकल्प समाज के लिए एक प्रेरणा पुंज है। समापन समारोह में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के राज्य मंत्री अविनाश गहलोत शिरकत करेंगे। 

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