गाडरमाला में गायत्री महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण कथा: 'स्वयं के सुधार से ही होगा समाज का नवनिर्माण'

Update: 2026-03-02 07:23 GMT

गुरला (बद्री लाल माली)। गाडरमाला में गायत्री परिवार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिन भक्ति और वैचारिकी का संगम देखने को मिला। शांति कुंज से आए कथावाचक गोपाल स्वामी ने प्रज्ञा पुराण कथा के दौरान वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अध्यात्म मात्र एक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक गहरी अनुभूति है।

विचारों का पतन है विषमताओं का मूल कारण

गोपाल स्वामी ने प्रवचन के दौरान कहा कि आज समाज में जो विषमताएं और बुराइयां दिखाई दे रही हैं, उनका मुख्य कारण विचारों का पतन है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के संदेश को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "समाज तभी बदलता है जब मनुष्य के विचारों में परिवर्तन आता है और इसकी शुरुआत हमेशा स्वयं से करनी होती है।"

शिक्षा और संस्कारों पर जोर

कथावाचक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में शिक्षा केवल भौतिक सुख-सुविधाओं और अर्थोपार्जन के आधार पर दी जा रही है, जबकि आज समाज को 'सुसंस्कारों' की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने वेदों और पुराणों का हवाला देते हुए बताया कि इनमें संस्कृति उत्थान के कई गूढ़ रहस्य छिपे हैं। मनुष्य को स्वार्थ लोलुपता त्याग कर ईमानदारी, जिम्मेदारी और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि कर्मों का फल स्वयं को ही भुगतना पड़ता है।

15 कुण्डीय यज्ञ में दी आहुतियां, 79 श्रद्धालुओं ने ली दीक्षा

आयोजन के दूसरे दिन विशेष उत्साह देखा गया। पूर्व निर्धारित 9 कुण्डीय यज्ञ के स्थान पर श्रद्धालुओं की भारी आवक को देखते हुए 15 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ संपन्न किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण और मानव उत्थान की कामना के साथ आहुतियां दीं।

दीक्षा संस्कार: इस अवसर पर 79 श्रद्धालुओं ने गायत्री परिवार की विधिवत दीक्षा ग्रहण कर श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया।

दीप यज्ञ: संध्या काल में दीप यज्ञ और सामूहिक आरती का आयोजन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

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