हर बजट में आशा, हर बार निराशा, वर्षों से इंतजार में ग्रामीण, क्या इस बार बदलेगी गुरलां की तस्वीर

Update: 2026-02-09 13:09 GMT


गुरला (बद्री लाल माली) भीलवाड़ा जिले में पंचायत समिति सुवाणा का बड़ा कस्बा होने के बावजूद गुरला आज भी आवश्यक प्रशासनिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। वर्षों से लंबित मांगें - गुरलां को उप तहसील का दर्जा देने, पंचायत समिति खोलने,पुलिस चौकी स्थापना तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत करने , ग्रामीण स्टेडियम बनाने की अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में गुरला में उप तहसील खोलने की व पंचायत समिति घोषणा की गई थी, लेकिन यह घोषणा अमल में नहीं आ सकी और मामला बाद में ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार के भी दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन इन प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में अब सरकार के तीसरे बजट राजस्थान बजट 2026 को लेकर गुरलां एवं आसपास के लोगो की उम्मीदें एक बार फिर केंद्रित हो गई हैं। जिनका कहना है कि उप तहसील नहीं होने से राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के 5 किलोमीटर उन्हें कारोई उपतहसील, या तहसील कार्यालय भीलवाड़ा जाना पड़ता है। भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण, जाति एवं मुल निवास प्रमाण पत्र जैसे कार्यों में समय और धन दोनों की अनावश्यक बर्बादी होती है। वहीं पुर्व में गुरला में पुलिस चौकी थी अब वह भी गुरला में नहीं होने से सीमित अधिकारों के कारण अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई में देरी होती है। स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर कस्बे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, जहां प्रसव सुविधा और सामान्य जांच सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सीमित संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव और हाईवे 758 पर होने से दुर्घटना में आपातकालीन उपचार की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गंभीर मरीजों को भीलवाड़ा , उदयपुर के बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत किए जाने से विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, बेहतर सेवाएं और विस्तारित उपचार सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे क्षेत्र की बड़ी आबादी को राहत मिलेगी। गुरला में आयुर्वेदिक चिकित्सालय नहीं होने से गुरला के ग्रामीणों को प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ नहीं मिल रहा है कस्बे के सामाजिक संगठनों और जागरूक लोगों का कहना है कि जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से गुरला सबसे बड़ा कस्बा है, इसके बावजूद यहां उप तहसील, पंचायत समिति,पुलिस चौकी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , आर्युवेदिक चिकित्सालय, जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच यह क्षेत्र लगातार उपेक्षित रहा है। शिक्षा क्षेत्र में विज्ञान संकाय खोलने की आवश्यकता जताई इसी क्रम में ग्रामीणों ने राजस्थान बजट 2026 में उप तहसील खोलने, पुलिस चौकी खोलने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत करने, नया आर्युवेदिक चिकित्सालय खोलने, रोडवेज बसों का स्टोपेज बस स्टैंड घोषित करने , चम्बल परियोजना से जोडने की मांग की है।लोगों को उम्मीद है कि इस बार बजट में इन मांगों पर ठोस निर्णय लेकर उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा। अब यह देखना होगा कि क्या बजट 2026 वास्तव में गुरला को बुनियादी सुविधाओं की सौगात देगा, या फिर यह कस्बा एक बार फिर आश्वासनों और इंतजार तक ही सीमित रह जाएगा।

इनका कहना है कस्बे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों और आपातकालीन उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से गंभीर मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने से क्षेत्र की बड़ी आबादी को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। प्राकृतिक चिकित्सा के लिए नया आर्युवेदिक चिकित्सालय खोलने की आवश्यकता है बड़ा कस्बा होने के बावजूद गुरला में उप तहसील , पंचायत समिति नहीं होने से राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए उन्हें भीलवाड़ा व सुवाणा जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है, जबकि उप तहसील व पंचायत समिति बनने से आसपास के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा पुलिस चौकी के नहीं होने के कारण कई मामलों में तत्काल कार्रवाई संभव नहीं हो पाती। चौकी को थाने में क्रमोन्नत किए जाने से कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए शिव नगर के ऑपन कुएं से गांव में पाइप लाइन जोड़ने और चम्बल परियोजना का पानी की सफ्लाई करे एवं जर्जर हालत टंकी को हटाते हुए अमृत 2 के तहत उच्च जलाशय का निर्माण करें

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