खजूरी: स्वच्छ भारत मिशन की उड़ी धज्जियां, खबर के असर के बाद पंचायत ने समाधान के बजाय बंद किया कचरा संग्रहण
खजूरी (अक्षय पारीक)। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को धरातल पर उतारने के दावों की खजूरी उप तहसील मुख्यालय पर पोल खुलती नजर आ रही है। बीते 23 मार्च को प्रमुखता से प्रकाशित खबर, जिसमें बताया गया था कि पंचायत द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के लिए लगाए गए ट्रैक्टर द्वारा खुले में कचरा डालने से गौवंश पॉलीथिन खाने को मजबूर है, उस पर सुधारात्मक कार्यवाही करने के बजाय पंचायत प्रशासन ने बेहद चौंकाने वाला कदम उठाया है। पंचायत ने समस्या का समाधान करने के बजाय मिशन के तहत चल रहे कचरा संग्रहण ट्रैक्टर को ही दो दिनों से बंद कर दिया है।
जिम्मेदारों के पास नहीं कोई ठोस जवाब
इस पूरे मामले में जब जिम्मेदार अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से जवाब मांगा गया, तो उनकी अनभिज्ञता और टालमटोल वाला रवैया सामने आया।
सरपंच कालू बलाई: उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कल ही पता चला है। अब वे अपने बेटे मुकेश और सचिव से बात करके ही बता पाएंगे कि आखिर ट्रैक्टर क्यों बंद किया गया।
सचिव सियाराम मीणा: सचिव ने भी मामले में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वे कल आकर वस्तुस्थिति का पता लगाएंगे और फिर कुछ कह पाएंगे।
ट्रैक्टर मालिक का छलका दर्द: 5 महीने से नहीं हुआ भुगतान
कचरा संग्रहण कार्य में लगे ट्रैक्टर मालिक राजाराम मीणा ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राजाराम ने बताया कि कचरा डालने वाली जगह को लेकर विवाद पहले भी हुआ था, जिसकी सूचना उन्होंने सरपंच और सचिव को दी थी और वहां तारबंदी करवाने का सुझाव दिया था, लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
हैरानी की बात यह है कि 17,000 रुपये प्रति माह के अनुबंध पर चल रहे इस ट्रैक्टर का पिछले 5 महीनों का भुगतान भी अटका हुआ है। राजाराम के अनुसार, 5 महीने के काम के बदले उन्हें मात्र 20,000 रुपये दिए गए हैं। भुगतान न होने और कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था न होने के कारण सरपंच को सूचित कर ट्रैक्टर बंद किया गया है।
जनता की पीड़ा: आखिर कहां जाए आम आदमी?
एक ओर सरकार स्वच्छता को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर बजट का बहाना बनाकर मिशन को बीच में ही छोड़ देना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। खजूरी की आम जनता अब इस उहापोह में है कि वे अपनी पीड़ा किसे सुनाएं। कचरा संग्रहण बंद होने से गांव में गंदगी के ढेर लगने की आशंका बढ़ गई है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है।
