पंचवटी बी सेक्टर: प्रशासन की अनदेखी और भेदभाव से गहराया जन आक्रोश

Update: 2026-03-14 08:10 GMT

भीलवाड़ा । शहर के पंचवटी बी सेक्टर में नगर परिषद और संबंधित प्रशासन की उदासीनता एवं भेदभावपूर्ण नीति के चलते क्षेत्रवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सुविधाओं के नाम पर शून्य और समस्याओं के अंबार ने स्थानीय निवासियों में भारी रोष पैदा कर दिया है।

धार्मिक आस्था का केंद्र 'छतरी वाला पार्क' बदहाली का शिकार

सचिव सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि क्षेत्र का एकमात्र 'छतरी वाला पार्क' अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने यहां अपनी श्रद्धा से कल्पवृक्ष जोड़ा, गूलर, पारस पीपल, पंचरूपी वृक्ष, बड़, नीम और बिल्व पत्र जैसे अलौकिक व दैवीय वृक्ष लगाए हैं। विडंबना यह है कि प्रशासन के असहयोग के कारण यह स्थान अब 'झाड़-झंखाड़' वाले उजाड़ में तब्दील हो चुका है। पार्क की बाउंड्री वॉल मात्र दो फीट ऊंची है, जिसे फांदकर मवेशी अंदर घुस जाते हैं और पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां न तो बैठने के लिए कुर्सियां हैं, न ही जमीन को समतल कर घास लगाई गई है।

सड़कें और रोशनी: 15 वर्षों से डामरीकरण का इंतजार

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पंचवटी के अन्य सेक्टरों में पिछले कुछ सालों में दो से तीन बार सड़कों का निर्माण हो चुका है, लेकिन बी सेक्टर में 10-15 वर्षों से डामरीकरण नहीं हुआ। रेगर छात्रावास से लेकर अंत तक का मार्ग कंटीली झाड़ियों से घिरा है, जिससे गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं। वहीं, क्षेत्र की रोड लाइटें भी पूरी तरह ठप हैं। अधिकांश खंभों से लाइटें गायब हैं और केवल लोहे के पाइप खड़े रह गए हैं, जबकि हरणी निवासी भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।

पानी की प्रचुरता, फिर भी प्यासा है सेक्टर

जल संकट को लेकर प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि क्षेत्र में पर्याप्त भू-जल स्तर होने के बावजूद चालू नलकूपों और हैंडपंपों की मरम्मत करने के बजाय विभाग उनके पाइप निकालकर ले गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इनका रिबोर या सामान्य मरम्मत करवाई जाए, तो क्षेत्र की पेयजल समस्या का समाधान हो सकता है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में क्षेत्रवासी अब बड़े आंदोलन की राह पर हैं।

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