सीए परीक्षा में स्टडी एज का दबदबा: कृष टहलानी जिले में दूसरे स्थान पर, संस्थान का शानदार प्रदर्शन

Update: 2026-03-10 09:01 GMT

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा के प्रमुख वाणिज्य शिक्षण संस्थान 'स्टडी एज इंस्टिट्यूट' ने एक बार फिर चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) की परीक्षाओं में अपनी सफलता का परचम लहराया है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा घोषित सीए इंटरमीडिएट और फाउंडेशन के परिणामों में संस्थान के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भीलवाड़ा का मान बढ़ाया है।

इंटरमीडिएट में जिले की दूसरी रैंक पर जमाया कब्जा

संस्थान के होनहार छात्र कृष टहलानी ने सीए इंटरमीडिएट (दोनों ग्रुप) में 377 अंक अर्जित कर पूरे भीलवाड़ा जिले में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही वे संस्थान के टॉपर भी रहे। कृष के अलावा इंटरमीडिएट के दोनों ग्रुप में भूमि विजयवर्गीय, मनस्वी जैन, आकाश मेहरा, भाविका सबदानी और भूमिका तुलसानी ने सफलता हासिल की। वहीं, सिंगल ग्रुप में अक्षरा सिंघवी, कशिश जैन, श्रेयांश जैन, आशुतोष वैष्णव, रुचिका शर्मा, रिया जैन, प्रियांशु नुवाल और अविनाश पडियार ने भी सीए बनने की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए हैं।

सीए फाउंडेशन में जानवी जैन अव्वल

फाउंडेशन परीक्षा में संस्थान की छात्रा जानवी जैन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इनके साथ ही राधिका मुंदड़ा, प्रियांश नाहटा, हंसिका विजयवर्गीय, नीव खोतानी, साक्षी आचार्य, रिधिमा अजमेरा, पुष्पा स्वामी, रोनक टेलर, शोभित जैन, मनीष मेवाड़ा, अखिल काबरा, नंदिनी शर्मा, अर्पित शर्मा और जनिषा अजमेरा ने भी सफलता का स्वाद चखा।

लगातार 5 वर्षों से ऑल इंडिया रैंक का रिकॉर्ड

स्टडी एज इंस्टिट्यूट पिछले कई वर्षों से कॉमर्स के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है। हाल ही में फरवरी 2026 में आयोजित सीएमए इंटरमीडिएट परीक्षा में संस्थान के पार्थ गट्टानी ने ऑल इंडिया 39वीं रैंक प्राप्त की थी। संस्थान पिछले 5 सालों से लगातार ऑल इंडिया रैंक (AIR) दे रहा है, जिसके चलते न केवल भीलवाड़ा बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं।

सफलता का मंत्र: नियमित टेस्ट और फैकल्टी का साथ

अपनी सफलता पर कृष टहलानी और जानवी जैन ने बताया कि अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, नियमित टेस्ट सीरीज और 24×7 डाउट सॉल्विंग की सुविधा ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। संस्थान में विषयों को बिल्कुल बेसिक से समझाने और परीक्षा पूर्व विशेष तैयारी कराने से यह उपलब्धि संभव हो पाई है।

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