सफलता की कहानी: नेपियर घास और आधुनिक तकनीक से चमकी रतनलाल की किस्मत

Update: 2026-03-25 09:10 GMT

भीलवाड़ा । भीलवाड़ा जिले के प्रगतिशील किसान रतनलाल ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सटीक तालमेल से खेती और पशुपालन के क्षेत्र में सफलता की एक नई इबारत लिखी है। कभी चारे की किल्लत से जूझने वाले रतनलाल आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

नेपियर घास ने मिटाई चारे की कमी

वर्ष 2023-24 में कृषि विभाग के सहयोग से रतनलाल ने अपने खेत पर उन्नत 'नेपियर घास' का प्रदर्शन लगाया। तेजी से बढ़ने वाली और बार-बार कटाई के बावजूद भरपूर पैदावार देने वाली इस घास ने उनके पशुओं के लिए सालभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। रतनलाल ने चतुराई दिखाते हुए खेत को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर रिजका, कासणी, मैथी, जौ और चरी जैसे चारे भी उगाए हैं, जिससे पशुओं को संतुलित और विविध पोषण मिल रहा है। इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में वृद्धि के रूप में देखने को मिला है।

चाफ कटर से रुकी बर्बादी, बढ़ा मुनाफा

खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में रतनलाल ने कृषि विभाग से अनुदानित 'चाफ कटर' मशीन का उपयोग शुरू किया। अब वे हरे और सूखे चारे की कुट्टी बनाकर पशुओं को खिलाते हैं। इससे न केवल चारे की बर्बादी रुकी है, बल्कि पशु भी इसे चाव से खाते हैं। रतनलाल का कहना है कि इस मशीन से समय और श्रम की भारी बचत हुई है और पशुपालन अब पहले से कहीं अधिक लाभदायक सौदा साबित हो रहा है। अपनी इस उपलब्धि और कृषि क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया है।

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