भीलवाड़ा । जीवन में जैसी हमारी दृष्टि होगी वैसी ही सृष्टि नजर आएगी। यदि हमारी दृष्टि अच्छी हुई तो सब कुछ अच्छा नजर आएगा ओर दृष्टि बुराई वाली हुई तो हर चीज बुरी नजर आएगी। अच्छे को सब अच्छा ओर बुरे को सब बुरा ही दिखता है। जिसकी जैसी भावना होती है भगवान उसको वैसा ही फल प्रदान करते है। पूतना कन्हैया के प्राण हरना चाहती थी तो भगवान ने उसके प्राणों का पान कर लिया। दृष्टि अच्छी होने पर जीवन अच्छा हो जाता है। ये विचार शहर के रोडवेज बस स्टेण्ड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में स्व.श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के पांचवें दिन शुक्रवार को रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत ओजस्वी प्रखर वक्ता श्री दिग्विजय रामजी महाराज ने व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए। पांचवे दिन श्रीकृष्ण बाल लीला एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग का वाचन किया गया एवं छप्पन भोग की आकर्षक झांकी सजाई गई। कथा में संत दिग्विजयरामजी महाराज ने कहा कि भजन ओर भोजन दोनों जरूरी है क्योंकि भजन से आत्मा का ओर भोजन से शरीर का पोषण होता है। जीवन में भजन करने, सेवा करने एवं पुण्य करने में तनिक भी विलंब नहीं करना चाहिए। जिनको एक बार प्रभु का आश्रय मिल जाता है फिर माया भी उसकी दासी बनकर घूमती है। उन्होंने भजन मत कर काया का अभिमान के के माध्यम से प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि जीवन में कभी काया ओर माया का अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि दोनों का कोई भरोसा नहीं कब साथ छोड़ जाए। सेवा,सुमिरन एवं सत्संग कर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। महाराजश्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वाचन करते हुए कहा कि नंद और यशोदा ने कन्हैया की बाल लीलाओं का आनंद किस तरह प्राप्त किया इसकी भी चर्चा की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत को धारण करने के प्रसंग का वाचन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने गिरिराज गोवर्धन महाराज की पूजा करने की प्रेरणा प्रदान करके देवराज इन्द्र के अभिमान को नष्ट किया। इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाने के कारण भगवान को गिरिराज धरण का नाम भी दिया गया। इस प्रसंग के दौरान पांडाल गिरिराज धरण के जयकारों से गूंज उठा। कथा में गिरिराज धरण की सजीव झांकी भी सजाई गई। कथा के दौरान भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए भगवान शंकर के जोगी का रूप लेकर यशोदा के घर आने के प्रसंग की भी चर्चा की। श्री गणेश उत्सव प्रबंध एवं सेवा समिति के अध्यक्ष उदयलाल समदानी ने भी व्यास पीठ पर विराजित संत दिग्विजयरामजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। पांचवें दिन की कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती तोषनीवाल परिवार के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने की। कथा के शुरू में श्रद्धालुओं द्वारा भागवतजी की आरती की गई। मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया। कथा में छठे दिन शनिवार को उद्धव चरित्र, रूक्मणी विवाह प्रसंग का वाचन होगा एवं समापन दिवस रविवार को कथा पूर्णाहुति से पूर्व सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन होगा।
*कृष्ण भक्ति की रसधारा में डूबकर झुमते रहे श्रद्धालु*
श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में पांचवें दिन भी विभिन्न प्रसंगों के वाचन के दौरान श्रद्धालु संगीतमय भक्तिरस में डूबे रहे। कृष्ण की बाललीला प्रसंग की चर्चा करते हुए आजा म्हारा कानोडा कई वेजो, ओ मैया तेरे द्वारे बाला जोगी आयो, द्वारिका को नाथ म्हारा राजा रणछोड़जी, झूलनी पर सेठ सावरो झुलवा ने जावे सा, गुर्जर को पकड्यो हाथ छुड़ाए दीनानाथ जैसे भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमते रहे। उन्होंने श्रीनाथजी को छप्पन भोग लगाए जाने के अवसर पर उनकी स्तुति में भजन म्हारे लाडीला श्रीनाथजी ने खम्मा रे खम्मा गाया तो पूरा पांडाल श्रीजी के जयकारों के बीच भक्तिसागर में डूब झूमने लगा।
*राष्ट्रीय संत डॉ. मिथिलेश नागर कल करेंगे संगीतमय सुंदरकांड*
श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के दौरान 7 फरवरी शनिवार को शाम 7 बजे से राष्ट्रीय संत नैनौराधाम के डॉ. मिथिलेश नागर के मुखारबिंद से संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन होगा। डॉ. नागर देशभर में विभिन्न स्थानों पर संगीतमय सुंदरकांड पाठ कर चुके है एवं उनके मुखारबिंद से सुंदरकांड पाठ सुनने के लिए भक्त उमड़ते है।